बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

8 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट की। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदी की जल वहन क्षमता प्रभावित होती है और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचना पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग को आवश्यक बताया।

ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से वन सलाहकार समिति के निर्णयों और सिफारिशों के आधार पर वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया, ताकि संबंधित प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा हो सके।

उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर नदी ड्रेजिंग के लिए अलग श्रेणी बनाने की मांग भी रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के बाद नदी चैनल से मलबा हटाने का उद्देश्य पारंपरिक खनन नहीं, बल्कि नदी की जल वहन क्षमता बहाल करना, प्रवाह में अवरोध हटाना और मानव जीवन व सार्वजनिक अधोसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

क्षतिपूरक वनीकरण से छूट की मांग

मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक ड्रेजिंग परियोजनाओं को क्षतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों में वन भूमि का गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए डायवर्जन नहीं होता, बल्कि इनका मुख्य उद्देश्य नदी प्रवाह को सुचारू बनाना और बाढ़ के जोखिम को कम करना है।

उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद नदियों में जमा होने वाली सामग्री की मात्रा कई बार काफी अधिक होती है। ऐसे में ड्रेजिंग से निकाली गई सामग्री के सुरक्षित, विनियमित और उचित उपयोग एवं निस्तारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था विकसित किया जाना आवश्यक है।

वैज्ञानिक आकलन के आधार पर होंगे ड्रेजिंग कार्य

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा ड्रेजिंग कार्य केवल वैज्ञानिक आकलन, रीप्लेनिशमेंट स्टडी और विस्तृत ड्रेजिंग प्लान के आधार पर किए जाएंगे। हटाई जाने वाली सामग्री की मात्रा और ड्रेजिंग क्षेत्र का निर्धारण वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग कार्य केवल गैर-मानसून अवधि में सभी पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए किए जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार इन्हें संबंधित वन एवं नदी प्रबंधन योजनाओं का हिस्सा भी बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ड्रेजिंग से प्राप्त सामग्री के विनियमित उपयोग एवं निस्तारण से अर्जित शुद्ध राजस्व का उपयोग सतत विकास और वन संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने दिया सहयोग का आश्वासन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि हिमाचल प्रदेश में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की व्यावहारिक आवश्यकताओं और हितों को भी उचित रूप से ध्यान में रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग से संबंधित मामलों पर विचार करते समय हिमाचल प्रदेश के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा प्रभावी नदी प्रबंधन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, प्रधान सचिव (वन) एम. सुधा तथा मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे।

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