
9 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

कुल्लू: मंडी सांसद कंगना रनौत के हालिया बयानों और प्रशासनिक बैठकों में उनके कथित सख्त रुख को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कुल्लू सदर से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने सांसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की भाषा और व्यवहार में प्रशासनिक मर्यादा के साथ हिमाचल की संस्कृति और गरिमा भी दिखाई देनी चाहिए।
विधायक ने आरोप लगाया कि जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक के दौरान अधिकारियों के साथ कथित तौर पर जिस तरह का व्यवहार किया गया और कड़े एवं असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वह हिमाचल की प्रशासनिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास योजनाओं को गति देने की है, न कि सार्वजनिक मंच पर अधिकारियों को अपमानित करने की।
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में बैठकों के दौरान कथित तौर पर अपनाया गया सख्त रवैया अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व से संज्ञान लेने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों के ऐसे कथित आचरण को नजरअंदाज किया गया, तो इससे राजनीतिक विवाद के साथ-साथ हिमाचल की प्रशासनिक व्यवस्था और प्रदेश की छवि को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
कुल्लू विधायक ने मंडी सांसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्हें अपने ही संसदीय क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस जनप्रतिनिधि को अपने संसदीय क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों की बुनियादी जानकारी तक नहीं हो, उससे प्रशासनिक समन्वय और प्रभावी निगरानी की कितनी उम्मीद की जा सकती है।
विधायक ने आरोप लगाया कि धरातल पर विकास कार्यों को लेकर गंभीरता दिखाने के बजाय अधिकारियों के साथ विवाद और बयानबाजी सुर्खियों में आना जनहित के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विकास और जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
अब सभी की नजरें भाजपा संगठन और मंडी सांसद कंगना रनौत की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। इस मुद्दे को लेकर हिमाचल की राजनीति में आने वाले दिनों में सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।





