
6 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं श्री नैना देवी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए उनके विधानसभा क्षेत्रों के दौरों और करोड़ों रुपये की घोषणाओं को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि तीन साल तक जनता की सुध नहीं लेने वाली कांग्रेस सरकार अब चुनाव नजदीक आते ही घोषणाएं कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को नई घोषणाओं के लिए बजट का स्रोत भी स्पष्ट करना चाहिए।
रणधीर शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश सरकार के पास सड़कों की मरम्मत, एचआरटीसी बसों के टायर बदलने, खराब मशीनरी ठीक करवाने और विधायक निधि जारी करने तक के लिए पर्याप्त धन नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्थानीय वेशभूषा पहनकर जनता के बीच जाने और उनके साथ भोजन करने के बजाय सरकार की नाकामियों का जवाब दें।
शर्मा ने आपदा राहत राशि के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ, एसडीएमएफ, एनडीआरएफ और पीडीएनए सहित विभिन्न मदों में हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी है। उनके अनुसार, पीडीएनए के तहत 2,006.40 करोड़ रुपये की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत हुई, जिसमें केंद्र का हिस्सा 1,504.80 करोड़ रुपये है। उन्होंने जुलाई और दिसंबर 2025 में 1,053.36 करोड़ रुपये जारी किए जाने का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा प्रभावितों के लिए आई राशि का इस्तेमाल कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, स्वीकृत कार्यों से हटकर धन खर्च करने और भाजपा विधायकों के क्षेत्रों की अनदेखी कर कांग्रेस नेताओं के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के आरोप लगाए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग में ऑफलाइन टेंडर की सीमा एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने, बड़े कार्यों को छोटे हिस्सों में बांटने और बिना काम भुगतान किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
रणधीर शर्मा ने सरकार से श्वेत पत्र जारी कर केंद्र से मिली प्रत्येक किस्त, विभागवार और विधानसभा क्षेत्रवार खर्च, ठेकेदारों के नाम तथा भुगतान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने महिलाओं को 1,500 रुपये देने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और रोजगार के वादों पर भी सरकार से जवाब मांगा। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार के 2,200 से अधिक संस्थान बंद कर जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित किया है।





