
3 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

हिमाचल प्रदेश में सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स की जांच सेवाएं प्रभावित होने को लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जम्वाल ने आरोप लगाया कि करीब 110 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने के कारण कंपनी ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सैंपल कलेक्शन सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर गरीब, मध्यमवर्गीय और दूरदराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि यदि भुगतान विवाद के चलते मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं में महंगी जांच करवानी पड़ रही है, तो सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त अथवा रियायती दरों पर मिलने वाली जांच सुविधाएं लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनका प्रभावित होना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला सहित विभिन्न अस्पतालों में सामान्य जांच सेवाएं प्रभावित होने और कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिलने की खबरें सामने आई हैं। सरकार को कंपनी के बकाये, कर्मचारियों के लंबित वेतन और मरीजों के लिए वैकल्पिक जांच व्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
भाजपा विधायक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में शुरू की गई जनकल्याणकारी और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की निरंतरता बनाए रखना वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
दिल्ली रैली में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
राकेश जम्वाल ने 1 नवंबर को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की रैली के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रैली में बसों की व्यवस्था, सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल और हिमाचल भवन एवं हिमाचल सदन के उपयोग को लेकर सरकार को सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने दिल्ली रैली के लिए सरकारी और निजी मिलाकर करीब 200 बसों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी थी। वहीं, भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया है कि रैली के कारण एचआरटीसी के कई रूट प्रभावित हुए और सरकारी संसाधनों का राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।
जम्वाल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि रैली में इस्तेमाल की गई सरकारी बसों का कितना किराया प्राप्त हुआ, मुख्यमंत्री की हेलीकॉप्टर यात्राओं का खर्च किस मद से वहन किया गया और दिल्ली स्थित सरकारी अतिथि गृहों के इस्तेमाल में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना प्रत्येक दल का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
अंत में राकेश जम्वाल ने प्रदेश सरकार से क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स के साथ भुगतान विवाद का शीघ्र समाधान करने, कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने और प्रभावित अस्पतालों में जांच सेवाएं पूरी क्षमता से बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी संसाधनों पर खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि जनता को समय पर उपचार मिल सके और सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता बनी रहे।





