
4 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला/चंडीगढ़

भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश के मीडिया संयोजक कर्ण नंदा और प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने चंडीगढ़ के पाइनव्यू होटल में आयोजित ‘जख्म 84 दे’ कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1984 के सिख विरोधी नरसंहार की दर्दनाक घटनाओं, पीड़ित परिवारों के संघर्ष और न्याय की लंबी लड़ाई को सामने लाना था।
कार्यक्रम में भाजपा पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों, पंजाब भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद रविशंकर प्रसाद सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम का संचालन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आर.पी. सिंह ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत 1984 के नरसंहार पर आधारित प्रदर्शनी के उद्घाटन और पीड़ितों की आत्मिक शांति के लिए अरदास के साथ हुई। विभिन्न सत्रों में प्रत्यक्षदर्शियों, पीड़ित परिवारों, अधिवक्ताओं और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।
कर्ण नंदा ने कहा कि 1984 का सिख नरसंहार भारतीय इतिहास की अत्यंत पीड़ादायक घटनाओं में से एक है। हजारों निर्दोष लोगों की हत्या और परिवारों के उजड़ने की त्रासदी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह केवल सिख समाज की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक संवेदना और न्याय व्यवस्था से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को इतिहास की सच्चाई से परिचित करवाते हैं और यह संदेश देते हैं कि किसी भी निर्दोष नागरिक के साथ हुए अन्याय को भुलाया नहीं जाना चाहिए। पीड़ित परिवारों ने दशकों तक न्याय के लिए संघर्ष किया है। उनके साहस, धैर्य और संकल्प को पूरा देश नमन करता है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने कहा कि 1984 के नरसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दशकों तक कानूनी और सामाजिक संघर्ष करना पड़ा। इस त्रासदी के दौरान हुई हिंसा, प्रशासनिक विफलताओं और दोषियों की जवाबदेही से जुड़े सवाल आज भी ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।
शर्मा ने वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका, न्यायमूर्ति एस.एन. धींगरा और अन्य कानूनी विशेषज्ञों के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के पुनर्वास, सम्मान और न्याय के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में सरदारनी निरप्रीत कौर, सरदारनी दर्शन कौर और बीबी जगदीश कौर सहित कई प्रत्यक्षदर्शियों ने अपने अनुभव साझा किए। विभिन्न सत्रों में न्यायिक जांच, दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास और पीड़ितों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
कर्ण नंदा और संजय शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि 1984 की त्रासदी से सबक लेते हुए सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना आवश्यक है। पीड़ितों की आवाज को सम्मान देना और आने वाली पीढ़ियों को ऐसी घटनाओं के प्रति जागरूक करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।





