
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
3 मई 2023
किरतपुर-नेरचौक फोरलेन शुरू होने के बाद बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में गोवा की तर्ज पर क्रूज और डल झील की तर्ज पर शिकारे उतारने की तैयारी पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन कर रहे हैं। क्रूज में सैलानी लग्जरी पार्टियां कर सकेंगे। यहां खाने-पीने से लेकर हर तरह की सुविधा होगी। निवेश के लिए बड़ी कंपनियां पर्यटन विभाग के संपर्क में हैं। तैयारी होने के बाद पर्यटन विभाग को झील में शिकारे, क्रूज और सभी प्रकार की बोट उतारने के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है।
पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन कई बार मंजूरी के लिए बीबीएमबी के पास आवेदन भी कर चुके हैं। उपायुक्त बीबीएमबी के अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं, लेकिन बीबीएमबी का कोई अधिकारी इस विषय पर रुचि नहीं दिखा रहा है। इस कारण निवेशक होने के बावजूद झील में शिकारे,क्रूज और बोट नहीं उतारे जा सके हैं। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन शुरू होने के साथ ही यह परियोजना धरातल पर उतरने से न केवल गोबिंदसागर झील में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि झील के साथ लगते कई धार्मिक और पर्यटन स्थल भी विकसित हों
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भी कोलबांध, गोबिंद सागर झील, चमेरा और पौंग डैम में वाटर स्पोटर्स गतिविधियां शुरू करने की घोषणा की है। इसके लिए सरकार बीबीएमबी के संपर्क में भी है। भाखड़ा बांध के लिए बिलासपुर के करीब आठ हजार परिवारों ने जमीन और पुश्तैनी घरों की कुर्बानी दी थी। आज भी ये परिवार विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। इन्हें न रोजगार और न ही रहने के लिए उपयुक्त स्थान मिला है।
भाखड़ा बांध से 65 किमी दूर होने के बावजूद भी मंजूरी देने को अड़ा है बीबीएमबी प्रबंधन गोबिंदसागर झील भाखड़ा बांध से 65 किलोमीटर दूर है। पर्यटन विभाग ने लिखकर दिया है कि झील के आसपास कोई निर्माण कार्य नहीं करवाया जाएगा। झील में बोट, शिकारे और क्रूज ही उतारे जाएंगे। फिर भी बीबीएमबी मंजूरी नहीं दे रहा है। वहीं, ऊना के अंदरोली की गोबिंदसागर झील भाखड़ा बांध से केवल 10 किलोमीटर ही दूर है। वहां बीबीएमबी ने गतिविधियों के लिए मंजूरी दी है।
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