
4/8/2026
केलांग
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हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व डॉ यशवन्त सिंह परमार की 120वीं जयंती लाहुल-स्पीति के मुख्यालय केलंग के जनजातीय संग्रहालय में मनाई गई
हिमाचल कला, संस्कृति अकादमी द्वारा आयोजित इस राज्य स्तरीय सम्मेलन की मुख्यातिथि लाहुल-स्पीति की जिलाधीश मैडम किरण भड़ाना रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ परमार ने हिमाचल प्रदेश के गांवों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ परमार एक ऐसे युगपुरुष थे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ लेखक तोबदन ने कहा कि आज जो विकास हम हिमाचल प्रदेश में देख रहे हैं, इसकी नींव डॉ परमार ने ही रखी थी।
प्रथम सत्र में लेखक संगोष्ठी हुई जिसमें लोक संस्कृति, इतिहास एवं लोक साहित्य के विद्वान डॉ सूरत ठाकुर ने ‘डॉ यशवन्त सिंह परमार का ग्रामीण विकास एवं भूमि सुधार में योगदान’ नामक विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि डॉ परमार ने अपने कार्यकाल में गांवों तक सड़कें पहुंचाने पर ज़ोर दिया। 1948 में जहां केवल 288 किलोमीटर वाहन योग्य सड़कें थीं, वहीं 1977 में उनके पद त्यागने तक 12000 किलोमीटर सड़कें बन चुकीं थी। डॉ सूरत ठाकुर ने शोधपत्र में यह भी बताया कि डॉ परमार ने जैलदारी प्रथा को समाप्त किया। इसमें ऋण लघुकरण बिल के माध्यम से कम ब्याज पर ऋण देने की सुविधा का प्रावधान किया। इन्होंने भूमि सुधार के लिए भूमि जोत सीमा अधिनियम 1972 विधानसभा से पास करवाया ताकि अधिक भूमि मालिकों के पास काम करने वाले भूमि श्रमिकों को अतिरिक्त भूमि मिल सके। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि प्रभात शर्मा रहे।
इस संगोष्ठी में वांगचुक शास्त्री, प्रो. राजकुमार, अजेय, सतीश लोपा तथा केन्द्रीय विद्यालय की छात्राएं पुष्पी ताग्मा, डिम्पल ने भी डॉ. यशवंत सिंह परमार के हिमाचल प्रदेश के विकास में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान पर अपने विचार सांझा किए। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. महेश शर्मा ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. गंगा राम राजी ने की। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों दीपक शर्मा, गणेश गनी, तारा नेगी, विनोद कुमार भावुक, रविन्द्र ठाकुर, डॉ सत्यनारायण स्नेही, रमेश चन्द्र मरस्ताना, केहर सिंह ठाकुर (भुंपाली), प्रभात शर्मा, डॉ महेश शर्मा, अरुण डोगरा, वैशाली विष्ट, देवयानी, यांगचेन निर्मला देवी आदि कवियों ने कविता पाठ किया। दूसरे सत्र का मंच संचालन डॉ. रमेश चन्द्र मरस्ताना ने किया।
मुख्य अतिथि उपायुक्त मैडम किरण भड़ाना (भा. प्र. से.) ने केलंग में कार्यक्रम आयोजित करने के लिये हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी का आभार व्यक्त किया और सम्मेलन में पधारे सभी साहित्यकारों का सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। भाषा अकादमी के अनुसंधान अधिकारी स्वतंत्र कुमार कौशल ने सभी आमंत्रित लेखकों, कवियों और छात्रों का धन्यवाद व्यक्त किया।
इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, अकादमी के अनिल कुमार, रविन्द्रनाथ और अमर सिंह भी उपस्थित रहे।






