हिंदी हमारी स्वाभिमान की भाषा, इसे सम्मान के साथ आगे बढ़ाएं’ : अनुपम कश्यप

9 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

शिमला: भाषा एवं संस्कृति विभाग, जिला शिमला की ओर से राजभाषा पखवाड़ा-2026 के तहत ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के गोथिक हॉल में जिला स्तरीय अंतरविद्यालय राजभाषा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में भाषण, निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं करवाई गईं, जिनमें शिमला के विभिन्न क्षेत्रों के 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिताओं के समापन समारोह में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला शिमला में राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को राजभाषा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास ममता पॉल, सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं, जिला शिमला कार्यालय तथा जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय शिमला के एसए राजेश ठाकुर शामिल रहे।

समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

हिंदी के साथ मातृभाषा का सम्मान जरूरी : अनुपम कश्यप

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि हिंदी देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से प्रयोग की जाने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में भी भाषा और गणित जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से नई-नई भाषाएं सीखने में रुचि लेने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक भाषा का हमारे जीवन में अपना महत्व है और अपनी मातृभाषा का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।

अनुपम कश्यप ने कहा कि हिंदी भाषा लोगों को अपनापन और जुड़ाव का भाव प्रदान करती है। उन्होंने भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से हिंदी के प्रचार-प्रसार और भाषा-संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन की दिशा स्वयं निर्धारित करने और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने का भी आह्वान किया।

भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए वर्षभर गतिविधियां

सहायक निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग अनिल हारटा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और प्रतियोगिताओं के आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाषा एवं संस्कृति विभाग विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से वर्षभर भाषा और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है।

उन्होंने बताया कि हिंदी 11 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की राजकीय भाषा है और हिमाचल प्रदेश भी हिंदी भाषी राज्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने और भाषा-संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने का आग्रह किया।

भाषण प्रतियोगिता में भार्गवी प्रथम

जिला भाषा अधिकारी शिमला सरोजना नरवाल ने प्रतियोगिताओं के परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि ‘हिंदी हमारी स्वाभिमान की भाषा’ और ‘हिंदी भाषा का वर्तमान और भविष्य’ विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय जतोग की भार्गवी ने प्रथम स्थान हासिल किया।

स्वर्ण पब्लिक स्कूल टूटीकंडी की आहाना दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि डीएवी लक्कड़ बाजार की भूमिका और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ठियोग के आरब ने संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया।

प्रश्नोत्तरी में सूमिति अव्वल

बहुविकल्पीय राजभाषा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में पीएम श्री राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ठियोग की सूमिति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अन्नाडेल की मुस्कान दूसरे और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर की प्राची गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं।

निबंध लेखन में विरासत ब्रामटा प्रथम

निबंध लेखन प्रतियोगिता में सम्भोता तिब्बतियन स्कूल छोटा शिमला के विरासत ब्रामटा ने प्रथम स्थान हासिल किया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ढली की ऋतु वर्मा दूसरे और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बालूगंज की अर्पिता ठाकुर तीसरे स्थान पर रहीं।

प्रतियोगिताओं का शुभारंभ प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ ने किया। निबंध लेखन प्रतियोगिता में सुदर्शन वशिष्ठ, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय और ओम प्रकाश शर्मा ने निर्णायक की भूमिका निभाई। भाषण प्रतियोगिता में डॉ. सत्य नारायण स्नेही, गोपाल दिलैक और डॉ. संतोष कुमार शर्मा निर्णायक रहे।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में उपमंडलाधिकारी नागरिक शिमला ग्रामीण मनजीत शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जिला लोक संपर्क अधिकारी शिमला सिंपल सकलानी, एपीआरओ अजय बन्याल, शिवम ठाकुर, अशोक कुमार, देवेंद्र कुमार देव सहित विभिन्न विद्यालयों के अध्यापक और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने और राजभाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

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