
16 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुनिहार

कुनिहार। कुनिहार क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कुनिहार पशु चिकित्सालय के अंतर्गत आने वाले जाबल जमरोट, कोठी, कुनिहार, बनोह, जाडली और मान क्षेत्रों में अब तक 120 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें आठ पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 94 पशुओं का उपचार जारी है। उपचार के बाद 18 पशु स्वस्थ हो चुके हैं।
पशु चिकित्सालय कुनिहार के अनुसार क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज का पहला मामला 19 अगस्त को सामने आया था। इसके बाद करीब एक महीने के भीतर संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक कुनिहार में 51, कोठी में 31, जाबल जमरोट में 22, बनोह में 10, जाडली में पांच और मान में एक पशु संक्रमित पाया गया है।
3,500 पशुओं का टीकाकरण
कुनिहार पशु चिकित्सालय के अंतर्गत करीब 3,600 गाय और भैंस पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार इनमें से करीब 3,500 पशुओं का लंपी रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है। जिन पशुओं में बीमारी के सक्रिय लक्षण हैं, उनका फिलहाल टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। विभाग ने स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण करवाने पर जोर दिया है।
पशु चिकित्सक डॉ. रीता कौशल ने बताया कि संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, शरीर पर दो से पांच सेंटीमीटर तक की कठोर गांठें, आंख और नाक से पानी आना, दूध उत्पादन में कमी, पैरों में सूजन और खुरों के आसपास सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को पशु को तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए।
पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह
विभाग ने पशुपालकों को संक्रमित पशुओं के खाने-पीने के बर्तन अलग रखने और पशुशाला में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। नया पशु खरीदने पर उसे तुरंत अन्य पशुओं के साथ न रखने और संभव हो तो कम से कम 25 दिन तक अलग रखकर निगरानी करने को कहा गया है।
पशुशाला में प्रवेश से पहले जूतों की सफाई और उचित कीटाणुनाशक का प्रयोग करने की भी सलाह दी गई है। यदि किसी संक्रमित पशु की मौत हो जाती है तो उसके बचे हुए चारे और अन्य संक्रमित सामग्री को दूसरे पशुओं के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए। ऐसी सामग्री का सुरक्षित निपटान पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार करने को कहा गया है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।





