हिंदी दिवस पर ‘समरस समाज-विकसित भारत का आधार’ पुस्तक का प्रस्तुतीकरण समारोह

16 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

शिमला। हिंदी दिवस के अवसर पर रोटरी टाउन हॉल शिमला में ‘समरस समाज-विकसित भारत का आधार’ पुस्तक का प्रस्तुतीकरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रज्ञा स्टडी सर्कल शिमला और सामाजिक समरसता गतिविधि के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। पुस्तक के लेखक अशोक कुमार बेरी और डॉ. हिमांशु अग्रवाल हैं।

पुस्तक में भारतीय समाज की विविधताओं के बीच सामाजिक समरसता, एकता, परस्पर सम्मान और सहभागिता जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया है। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी और सामाजिक समरसता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के संबंध को विभिन्न पहलुओं के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

विकास में अंतिम व्यक्ति की भागीदारी पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता रामकृष्ण मिशन शिमला के सचिव स्वामी तन्महिमानन्द ने की। उन्होंने भारतीय चिंतन परंपरा में समरसता और मानव कल्याण की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की प्रगति तभी सार्थक है, जब विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक नागरिक स्वयं को विकास प्रक्रिया का सहभागी महसूस करे।

मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर ठाकुर ने पुस्तक के विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए युवाओं में सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की बात कही।

विशिष्ट अतिथि शिमला विभाग संघचालक एवं साई एटर्नल फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य राजकुमार वर्मा ने सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय समाज में समन्वय और सह-अस्तित्व पर चर्चा

मुख्य वक्ता एवं पुस्तक के लेखक अशोक बेरी ने पुस्तक की विषय-वस्तु और लेखन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय समाज की परंपरा में समन्वय और सह-अस्तित्व के विचारों का उल्लेख करते हुए सामाजिक जीवन में समानता, सम्मान और सहभागिता की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के महत्व पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी संवाद के साथ-साथ भारतीय समाज और सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। हिंदी दिवस भारतीय भाषाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान को बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करता है।

समारोह में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, शोध छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। आयोजकों ने कहा कि पुस्तक के माध्यम से सामाजिक विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाने और युवा पीढ़ी को सामाजिक दायित्वों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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