
17 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की लोकसंस्कृति, देव परंपराओं और साहित्य को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार डॉ. सूरत ठाकुर को श्रीलंका में सम्मानित किया जाएगा। कोलंबो स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की ओर से 22 सितंबर 2026 को उन्हें साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया जाएगा।
यह सम्मान हिमाचल प्रदेश के लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में उनके कार्य तथा चर्चित पुस्तक ‘हिमाचल प्रदेश की जनजातीय लोकसंस्कृति’ के लिए दिया जा रहा है। इस उपलब्धि से हिमाचल के लोकजीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की उम्मीद है।
डॉ. सूरत ठाकुर लंबे समय से हिमाचल की लोक विरासत को साहित्य के माध्यम से संजोने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने देव परंपरा, लोकसंस्कृति और यात्रा साहित्य सहित विभिन्न विषयों पर दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है। उनके साहित्य में हिमाचल के लोकजीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता की झलक मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान को बताया गौरव का अवसर
श्रीलंका में मिलने वाले सम्मान पर डॉ. सूरत ठाकुर ने कहा कि हिमाचली संस्कृति पर लेखन करने वाले लेखक के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना गौरव और सौभाग्य की बात है। उन्होंने इसे हिमाचल की लोकसंस्कृति और साहित्य के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
इससे पहले डॉ. सूरत ठाकुर को हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी, शिमला और पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी, शिलांग सहित विभिन्न संस्थाओं की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। भुट्टि वीवर्स कोऑपरेटिव सोसायटी, शमशी की ओर से उन्हें चंद्रशेखर ‘बेबस’ राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध पत्र भी करेंगे प्रस्तुत
श्रीलंका प्रवास के दौरान डॉ. सूरत ठाकुर 25 सितंबर 2026 को कोलंबो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भी भाग लेंगे। सबरगमुवा विश्वविद्यालय, श्रीलंका, मधुर नारायण अंतरराष्ट्रीय हिंदी शोध संस्थान, बस्ती और टूरिज्म एंड हिस्टोरिकल अकादमी, थार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में वे ‘प्रेमचंद की कहानियों में ग्रामीण जीवन’ विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
डॉ. सूरत ठाकुर ने बताया कि वे 21 सितंबर 2026 को श्रीलंका के लिए रवाना होंगे। श्रीलंका में मिलने वाला यह सम्मान हिमाचली साहित्य और लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में उनके लंबे साहित्यिक योगदान का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
रिपोर्ट: सुशांत शर्मा, कुल्लू





