
14 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | कुल्लू

अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) कुल्लू ने जनभागीदारी और सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया। इनमें आपदा मित्रों, युवा स्वयंसेवकों और पंचायत प्रतिनिधियों को आपदा से बचाव, पूर्व तैयारियों तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
बहुउद्देशीय भवन के प्रशिक्षण हॉल में आयोजित अर्धदिवसीय कार्यशाला होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग, नेहरू युवा केंद्र संगठन और बाल रक्षा भारत के सहयोग से हुई। इसमें नेहरू युवा केंद्र और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित व्यवहार, राहत एवं बचाव कार्यों और आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भूमिका पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और आपदा के समय स्थानीय स्तर पर प्रभावी सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को आपदा जोखिम कम करने के लिए जरूरी बताया गया।
भुंतर में पंचायत प्रतिनिधियों को दिया प्राथमिक उपचार और सीपीआर का प्रशिक्षण
इसी कड़ी में डीडीएमए कुल्लू ने होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग और बाल रक्षा भारत के सहयोग से भुंतर विकास खंड के पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों के लिए भी अर्धदिवसीय कार्यशाला आयोजित की।
इस दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को आपदा पूर्व तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया और स्थानीय स्तर पर जोखिम कम करने के उपायों की जानकारी दी गई। होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रशिक्षकों ने प्राथमिक उपचार की तकनीकों के साथ कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। प्रशिक्षकों ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में समय पर प्राथमिक उपचार और सीपीआर किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय संसाधनों की पहचान करने और स्वयंसेवकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया गया।
डीडीएमए कुल्लू ने कहा कि जनभागीदारी, निरंतर प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयासों से आपदा के दौरान जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को आपदा से निपटने के लिए सक्षम बनाना और सुरक्षित समाज का निर्माण करना है।





