
6 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने सभी संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों को सफाई कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण के लिए सरकार के निर्धारित प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
शुक्रवार को बचत भवन शिमला में हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन, प्रतिषेध एवं पुनर्वास अधिनियम-2013 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें अधिनियम के क्रियान्वयन और पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की गई।
जिला में हाथ से मैला उठाने का कोई मामला नहीं
बैठक में नगर निगम शिमला, नगर परिषदों और नगर पंचायतों से मिली जानकारी के अनुसार उनके अधिकार क्षेत्र में हाथ से मैला उठाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उपायुक्त ने नियमित सर्वेक्षण और निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि इस अमानवीय प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
750 सफाई कर्मचारियों को मिल रहा न्यूनतम वेतन
नगर निगम शिमला ने बैठक में बताया कि उसके अधीन आउटसोर्स और स्वयं सहायता समितियों के माध्यम से लगभग 750 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। इन्हें प्रदेश सरकार के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार 425 रुपये प्रतिदिन की दर से न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है। स्थानीय निकायों में ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों को भी निर्धारित न्यूनतम वेतन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था
बैठक में बताया गया कि सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए नगर निगम तथा स्थानीय निकायों की ओर से शिविर लगाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य जांच के तहत ठियोग में 25, रोहड़ू में 37, रामपुर में 80, सुन्नी में 25, नेरवा में 20, चौपाल में 15 और नारकंडा में 22 कर्मचारियों की जांच की गई है। इसके अतिरिक्त विभिन्न स्वास्थ्य खंडों और अस्पतालों में भी स्वास्थ्य परीक्षण करवाए गए हैं।
कर्मचारियों को कार्य के दौरान सुरक्षा के लिए गमबूट, दस्ताने, फेस मास्क और अन्य आवश्यक उपकरणों वाली सैनिटरी किट उपलब्ध करवाई जा रही हैं। एसजेपीएनएल की ओर से भी सैनिटरी किट के साथ सक्शन और जेटिंग मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं, ताकि सीवरेज और सफाई संबंधी कार्य सुरक्षित तरीके से किए जा सकें।
सफाई कर्मचारियों के बच्चों को छात्रवृत्ति
शिक्षा विभाग की जानकारी के अनुसार जिला में छठी से बारहवीं कक्षा तक पढ़ने वाले 87 ऐसे बच्चे हैं, जिनके माता-पिता विभिन्न संस्थानों में कूड़ा उठाने का कार्य करते हैं। इनमें से 27 बच्चों के छात्रवृत्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत आवेदन किए गए हैं। उपायुक्त ने अधिकारियों को पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आवास सुविधा उपलब्ध करवाने पर चर्चा
बैठक में सफाई कर्मचारियों के लिए आवास सुविधा उपलब्ध करवाने का मुद्दा भी उठा। उपायुक्त ने नगर निगम शिमला को इस उद्देश्य से शहर के बाहर भूमि उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया, ताकि कर्मचारियों के लिए आवास सुविधा विकसित की जा सके।
बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, संयुक्त आयुक्त नगर निगम शिमला डॉ. भुवन शर्मा और जिला कल्याण अधिकारी कपिल देव शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।





