
5 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | मंडी

मंडी में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान सांसद कंगना रणौत द्वारा अधिकारियों के साथ कथित रूप से अपनाए गए तीखे एवं अपमानजनक लहजे पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव दीपक शर्मा ने आपत्ति जताई है।
दीपक शर्मा ने कहा कि विकास कार्यों की समीक्षा करना, सरकारी योजनाओं की प्रगति पर सवाल उठाना और सार्वजनिक धन के उपयोग की जवाबदेही तय करना जनप्रतिनिधियों का अधिकार और दायित्व है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जवाबदेही के नाम पर अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, कटाक्ष करना या उनकी कार्यक्षमता पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना लोकतांत्रिक एवं प्रशासनिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
विकास कार्यों में देरी के कारण स्पष्ट करने की मांग
दीपक शर्मा ने कहा कि सांसद निधि में राशि उपलब्ध होना और उसका तत्काल खर्च हो जाना अलग-अलग विषय हैं। उनके अनुसार विकास कार्यों को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, विभागीय औपचारिकताओं, निविदा प्रक्रिया और कार्यान्वयन सहित निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी की कार्यक्षमता पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किसी कार्य में देरी का वास्तविक कारण क्या है और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।
उन्होंने कहा, “सवाल पूछिए, लेकिन रिकॉर्ड के आधार पर। देरी पर जवाब मांगिए, लेकिन तथ्यों के आधार पर। जवाबदेही तय कीजिए, लेकिन नियम और प्रक्रिया के अनुसार। और सबसे महत्वपूर्ण—लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखिए।”
दिशा समिति को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच न बनाने की अपील
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिशा समिति का उद्देश्य केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना, विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकों को अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाने या राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण अंग हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की आवाज उठाना है, जबकि प्रशासन का काम निर्धारित नियमों के अनुरूप योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
“मंडी की जनता को विकास के परिणाम चाहिए”
दीपक शर्मा ने कहा कि मंडी की जनता अधिकारियों के साथ गुस्से या सार्वजनिक तकरार का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, रोजगार और अन्य विकास कार्यों के धरातल पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहती है।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों से जवाबदेही मांगना उचित है, लेकिन अधिकारी किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं। वे सरकारी व्यवस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपनी बात रखने तथा निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्य करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पद की गरिमा केवल जनप्रतिनिधियों के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक संवैधानिक और प्रशासनिक संस्था के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।
दीपक शर्मा ने कहा, “मंडी की जनता को राजनीतिक नाटक नहीं, विकास चाहिए। आरोप नहीं, परिणाम चाहिए। गुस्से का प्रदर्शन नहीं, समयबद्ध काम चाहिए और सबसे बढ़कर—जनता के पैसे और जनता के काम की वास्तविक जवाबदेही चाहिए।”
दीपक शर्मा
महासचिव, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी





