कुल्लू शाल की पहचान को नई धार, प्राकृतिक रंगों से हथकरघा उद्योग को मजबूती

9 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

कुल्लू: कुल्लू की पारंपरिक हथकरघा कला और बुनकरों को आधुनिक तकनीक एवं बाजार की बदलती जरूरतों से जोड़ने के उद्देश्य से भुट्टिको सभागार में भौगोलिक संकेतक (GI) जागरूकता और प्राकृतिक रंगों के उपयोग पर एक दिवसीय DIY कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य बुनकरों और प्रशिक्षणार्थियों को कुल्लू शाल की जीआई पहचान, प्राकृतिक रंगों के उपयोग तथा केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देना रहा। इसके माध्यम से बुनकरों को हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में उनकी अलग पहचान मजबूत करने के लिए व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में भुट्टिको अध्यक्ष एवं पूर्व बागवानी मंत्री ठाकुर सत्य प्रकाश मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। बुनकर सेवा केंद्र कुल्लू के प्रभारी उप निदेशक अनिल साहू, सहायक निदेशक विनय कुमार तथा जिला उद्योग केंद्र कुल्लू की प्रबंधक प्रवीण लता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

जीआई पहचान से कुल्लू शाल को मिली मजबूती

मुख्य अतिथि ठाकुर सत्य प्रकाश ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं हथकरघा बुनकरों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा करती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम और विकास आयुक्त हथकरघा की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कुल्लू शाल को हिमाचल प्रदेश का पहला जीआई प्रमाणन मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि कुल्लू शाल को जीआई पहचान दिलाने में भुट्टिको की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। जीआई प्रमाणन से पारंपरिक बुनाई शैली और सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिलने के साथ इसे बाजार में विशिष्ट पहचान बनाने में भी मदद मिली है।

प्राकृतिक रंगों से बाजार में अलग पहचान की कोशिश

ठाकुर सत्य प्रकाश ने कहा कि मशीनों से तैयार होने वाले उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हथकरघा क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां हैं। ऐसे में जीआई पहचान के साथ प्राकृतिक रंगों का प्रयोग कुल्लू के पारंपरिक उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रंगों से तैयार उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़े हैं। इससे हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

कार्यशाला के आयोजक एवं राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम के प्रभारी विपिन कंधोल तथा सहायक प्रबंधक बालेन्द्र सचान ने जीआई और प्राकृतिक रंगाई से जुड़ी तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी बुनकरों और प्रशिक्षणार्थियों को दी।

110 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, 39 को प्रमाण पत्र

एक दिवसीय कार्यशाला में कुल 110 बुनकरों एवं आईटीआई शमशी के प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान 39 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण पत्र मुख्य अतिथि ठाकुर सत्य प्रकाश ने वितरित किए।

इस अवसर पर भुट्टिको के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रोहित ठाकुर, निदेशक मदन लाल, सोहन सिंह, आत्मा राम, जोगध्यान, प्रेम सिंह, इंद्रा देवी, मुख्य महाप्रबंधक सुरती देवी, महाप्रबंधक दिनेश ठाकुर, किशन चंद, कविता ठाकुर, सहायक अभियंता अनुज ठाकुर, मुख्य सलाहकार रमेश ठाकुर और सलाहकार उत्पादन बहादुर सिंह सहित बुनकर सेवा केंद्र के रंगाई एवं डिजाइन विशेषज्ञ मौजूद रहे।

कार्यशाला को कुल्लू की पारंपरिक हथकरघा विरासत को जीआई पहचान, प्राकृतिक रंगों और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में उपयोगी पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्थानीय बुनकरों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और विशिष्टता के साथ नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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