नौणी विश्वविद्यालय के नेरी परिसर में स्थापित होगा पादप स्वास्थ्य निदान क्लिनिक

29 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | नौणी/हमीरपुर

हिमाचल प्रदेश में बागवानी फसलों के स्वास्थ्य प्रबंधन को मजबूत करने के लिए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में अत्याधुनिक पादप स्वास्थ्य निदान क्लिनिक स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने गुरुवार को वर्चुअल समारोह के माध्यम से प्रस्तावित क्लिनिक की आधारशिला रखी।

इस क्लिनिक के माध्यम से बागवानी फसलों में रोगों की पहचान, रोग निगरानी और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इससे किसानों, शोधकर्ताओं, प्रसार कार्यकर्ताओं और बागवानी अधिकारियों को लाभ मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पौधों में रोगों की समय रहते पहचान कर फसलों के स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार के लिए जरूरत के अनुसार पौध संरक्षण उपायों को बढ़ावा देना है।

समय पर रोग की पहचान से घटेगा फसलों का नुकसान

कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने कहा कि रोगजनकों की समय पर पहचान होने से किसानों को उचित प्रबंधन उपाय अपनाने में मदद मिलेगी। इससे फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ कीटनाशकों के अनावश्यक और बार-बार इस्तेमाल से भी बचा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत, कीटनाशक अवशेषों और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, रोगजनकों में कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध विकसित होने की समस्या पर नियंत्रण पाने में भी मदद मिल सकती है। रोपण सामग्री और बहुवर्षीय पौधों के ऊतकों में रोगजनकों की समय रहते पहचान से नए बागानों में रोगों के प्रवेश को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा सकेंगे।

जलवायु परिवर्तन के बीच बढ़ेगी रोग निगरानी की अहमियत

प्रो. बवेजा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान, आर्द्रता और वर्षा में हो रहे बदलाव पौध रोगों के विकास, प्रसार और भौगोलिक विस्तार को प्रभावित कर रहे हैं। इससे नए रोगों के उभरने और मौजूदा रोगों के नए बागवानी क्षेत्रों तक पहुंचने का जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से रोगों की निगरानी और समय पर निदान जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बागवानी स्नातकों, ग्रामीण युवाओं, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि संस्थानों के सहयोग से शुल्क आधारित रोग निदान सेवाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार समाधान मिलेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार तथा आय के नए अवसर पैदा होंगे।

एआई आधारित निदान और डिजिटल निगरानी पर भी जोर

इससे पहले महाविद्यालय नेरी के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. भारद्वाज ने कुलपति का स्वागत किया और प्रस्तावित क्लिनिक की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यहां पारंपरिक और उन्नत रोग निदान तकनीकों को क्षेत्रीय निगरानी तथा मौसम आधारित रोग जोखिम आकलन से जोड़ा जाएगा, जिससे पौध रोगजनकों की शीघ्र और सटीक पहचान संभव होगी।

प्रयोगशाला में रोग निदान, खेतों में निगरानी, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान-केंद्रित परामर्श सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा। इससे टिकाऊ रोग प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल बागवानी, बेहतर फसल स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण उपज को बढ़ावा मिलेगा।

प्रस्तावित सुविधा के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित रोग निदान, डिजिटल पौध स्वास्थ्य निगरानी, फसल संरक्षण परामर्श और सटीक बागवानी के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के स्नातकों को पौध स्वास्थ्य निदान केंद्र, मोबाइल निदान सेवाएं, कृषि-तकनीक स्टार्टअप और पौध संरक्षण परामर्श उद्यम स्थापित करने के लिए जरूरी कौशल हासिल करने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर डॉ. पी.के. बवेजा, विभागाध्यक्ष, कृषि मौसम विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग; डॉ. शशि शर्मा, डॉ. मोनिका शर्मा, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. बंदना धीमान, डॉ. प्रीति चौधरी, डॉ. दीपक अग्निहोत्री सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

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