
14 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | सुंदरनगर, मंडी

सुंदरनगर। विद्युत बोर्ड पेंशनर्ज फोरम सुंदरनगर इकाई की बैठक सुकेत सिनेमा परिसर में इकाई अध्यक्ष इंजीनियर के.एस. जम्वाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सेवानिवृत्त वरिष्ठ मुख्य अभियंताओं से लेकर लाइन स्टाफ और दिवंगत कर्मचारियों के पारिवारिक पेंशन धारकों ने भाग लिया।
बैठक की शुरुआत सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता ई.वी.के. लरोहिया के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर की गई।
बैठक में विद्युत बोर्ड प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर पेंशनरों ने नाराजगी जताई। फोरम पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश पेंशनर्ज फोरम की ओर से बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद प्रबंधन ने लंबे समय से कोई बैठक नहीं बुलाई है। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को संशोधित वेतनमान के अनुसार देय पेंशन एरियर का पूर्ण भुगतान नहीं किए जाने पर भी रोष व्यक्त किया गया।
इकाई अध्यक्ष ई.के.एस. जम्वाल, महासचिव सोहन सिंह चौहान और प्रदेश उप महासचिव जगमेल ठाकुर ने बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनवरी 2016 से अप्रैल 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके सेवाकाल के संशोधित वेतनमान के आधार पर एरियर का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इसके अलावा संशोधित लीव एनकैशमेंट और ग्रेच्युटी सहित अन्य देय लाभों के भुगतान में भी देरी हो रही है।
पेंशनर्ज फोरम ने कम्यूटेड पेंशन की रिकवरी को लेकर भी सवाल उठाए। पदाधिकारियों ने कहा कि सेवानिवृत्ति के समय कम्यूट की गई पेंशन की रिकवरी अभी भी पुराने 12 प्रतिशत से अधिक ब्याज की दर के आधार पर की जा रही है। उन्होंने मांग की कि इसे वर्तमान बैंक ब्याज दरों के अनुरूप करीब 7 प्रतिशत किया जाए।
15 प्रतिशत लंबित डीए के भुगतान की मांग
बैठक में करीब 15 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान नहीं होने पर भी चिंता जताई गई। फोरम ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि लंबित डीए का भुगतान जल्द किया जाए।
पेंशनर्ज फोरम ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश में संघर्षरत पेंशनर संगठनों के आंदोलन को गति देने के लिए वे भी परिवार सहित सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
बैठक में सेवानिवृत्त मुख्य अभियंताओं सहित बड़ी संख्या में पेंशनर एवं पारिवारिक पेंशन धारक मौजूद रहे। इस दौरान पेंशनरों ने लंबित वित्तीय लाभों का शीघ्र भुगतान और उनकी अन्य मांगों पर सरकार एवं विद्युत बोर्ड प्रबंधन से गंभीरता से विचार करने की मांग की।





