
1 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

शिमला। शांति विहार, संजौली स्थित सामुदायिक भवन में चलौंठी-भट्टाकुफर क्षेत्र में निर्माणाधीन ट्विन टनल एवं राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहे। स्थानीय लोगों ने परियोजना के सर्वे, टनल एलाइनमेंट, भवनों में आई दरारों, सुरक्षा, मुआवजे, जनसुनवाई और भविष्य में आवासीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों से जुड़ी चिंताएं सांसद और अधिकारियों के समक्ष रखीं।
बैठक में एनएचएआई के अधिकारी चंदेल और कपूर भी मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने परियोजना से संबंधित अपनी आशंकाओं और समस्याओं को विस्तार से उनके सामने रखा। बैठक में बताया गया कि स्थानीय लोगों ने ट्विन टनल प्रभावित संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति ने भट्टाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर और शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा को प्रभावित लोगों से जुड़े विषय संबंधित अधिकारियों और अन्य मंचों के समक्ष उठाने के लिए अधिकृत किया है।
बैठक में प्रभावित परिवारों एवं संपत्ति मालिकों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। स्थानीय लोगों गोविंद चित्रांटा, राजिंदर चौहान, अमित गांगटा, सविता ठाकुर और नितिका कैंथला सहित अन्य लोगों ने विभिन्न मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
पुराने सर्वे और मौजूदा एलाइनमेंट पर सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि परियोजना का कार्य पूर्व में किए गए सर्वे के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। उन्होंने पुराने सर्वे, वर्तमान एलाइनमेंट और निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जांच करवाने तथा पूरी स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।
लोगों ने क्षेत्र की भौगोलिक एवं भूगर्भीय संवेदनशीलता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बड़े स्तर की परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले विस्तृत जियो-टेक्निकल और सुरक्षा मूल्यांकन जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना शुरू करने से पहले प्रभावित क्षेत्र में व्यापक जनसुनवाई नहीं हुई और सभी हितधारकों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लिया गया।
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि टनल निर्माण का प्रभाव बड़ी संख्या में आवासीय भवनों पर पड़ सकता है। उनका कहना था कि क्षेत्र में ढलान काफी अधिक है और किसी एक भवन या भू-भाग में अस्थिरता आने की स्थिति में आसपास के अन्य भवन भी प्रभावित हो सकते हैं।
भवनों में दरारों और टनल की दूरी को लेकर चिंता
स्थानीय लोगों के अनुसार शांति विहार में भवनों में दरारें आने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। प्रशासन द्वारा सितंबर में टनल निर्माण से संबंधित कार्य रोककर IIT रुड़की के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक एवं तकनीकी आकलन कराने का निर्णय लिया गया था।
बैठक में टनल और आवासीय भवनों के बीच दूरी को लेकर भी सवाल उठाए गए। स्थानीय लोगों का दावा था कि कुछ स्थानों पर टनल आवासीय भवनों के बेहद करीब से गुजर रही है। उन्होंने इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाने की मांग की।
लोगों ने लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित क्षेत्र के धार्मिक एवं सामाजिक महत्व वाले स्थानों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि परियोजना के संभावित प्रभाव का आकलन करते समय ऐसे स्थलों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
IIT रुड़की कर रही जियो-टेक्निकल अध्ययन
बैठक में एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल संबंधित कार्य रोका गया है और IIT रुड़की की विशेषज्ञ टीम जियो-टेक्निकल अध्ययन कर रही है। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा संबंधी पहलुओं का आकलन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
“घर बनाने में पूरी जिंदगी लग जाती है”
बैठक को संबोधित करते हुए सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए उसका घर केवल एक भवन नहीं, बल्कि जीवनभर की मेहनत और उसकी बड़ी पूंजी होता है।
उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति को घर बनाने में पूरी जिंदगी लग जाती है। अगर किसी का घर टूट जाए या रहने लायक न रहे तो उसके लिए इससे बड़ा नुकसान शायद ही कोई हो सकता है। विकास आवश्यक है, लेकिन विकास से भी ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की जान और जिंदगी है।”
सुरेश कश्यप ने कहा कि उन्होंने इस विषय को लेकर प्रोजेक्ट डायरेक्टर और शिमला के उपायुक्त से भी बात की है। उन्होंने क्षेत्र का जायजा लेने के बाद कहा कि स्थानीय लोगों में जो डर और आशंका है, उसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी परियोजना में स्थानीय जनता को पूरी जानकारी देना, उन्हें जागरूक करना और आवश्यकता के अनुसार जनसुनवाई करना जरूरी है।
“यदि सर्वे बदला है तो कारण स्पष्ट किए जाएं”
सांसद ने अधिकारियों के समक्ष सवाल उठाया कि यदि परियोजना का प्रारंभिक सर्वे अथवा एलाइनमेंट बदला गया है तो इसके कारण स्थानीय लोगों के सामने रखे जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए कि भविष्य में संजौली में किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। यदि एक भवन प्रभावित होता है तो उसके पीछे या आसपास स्थित अन्य भवनों पर संभावित प्रभाव का भी वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक सवाल का स्पष्ट जवाब दिया जाए और तकनीकी विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
प्रभावित परिवारों के नुकसान की भरपाई का मुद्दा उठाएंगे
सुरेश कश्यप ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि लोगों की संपत्ति को हुए वास्तविक नुकसान का उचित आकलन किया जाना चाहिए और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत एवं मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर उच्च अधिकारियों और आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय मंत्री से भी बात करेंगे। प्रभावित क्षेत्र में रेस्टोरेशन कार्य युद्धस्तर पर करवाने तथा निर्माण कार्य में भूवैज्ञानिक, संरचनात्मक और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
बैठक के दौरान स्थानीय लोगों ने एनएचएआई अधिकारियों के समक्ष परियोजना की तकनीकी जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था, सर्वे और भविष्य की कार्ययोजना को सार्वजनिक करने की मांग रखी।
बैठक में भाजपा की ओर से राजिंदर चौहान, केशव चौहान, कर्ण नंदा, रीना और आशा सहित अन्य कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपस्थित रहे।
सुरेश कश्यप ने कहा कि सड़क और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी विकास परियोजना में मानव जीवन, लोगों के घरों की सुरक्षा और स्थानीय जनता का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।





