कारदार संघ की सदस्यता सत्यापन और निष्पक्ष चुनाव की मांग, देव संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट ने प्रशासन से हस्तक्षेप की उठाई मांग

29 सितंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | कुल्लू

कुल्लू। जिला कारदार संघ कुल्लू की सदस्यता, चुनाव प्रक्रिया और वर्तमान कार्यकारिणी के कार्यकाल को लेकर देव संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ट्रस्ट की ओर से कुल्लू में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संघ की सदस्यता सूची के निष्पक्ष सत्यापन, वैध कारदारों की पहचान और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव करवाने की मांग उठाई गई।

प्रेस वार्ता में ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी ओम प्रकाश शर्मा, जिला देवी-देवता कारदार संघ के पूर्व अध्यक्ष जय चंद ठाकुर तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के पूर्व अधिकारी सीताराम ठाकुर मौजूद रहे।

‘वाजिब-उल-अर्ज’ और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर सदस्यता सत्यापन की मांग

ओम प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि जिला कारदार संघ में सदस्यता और प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया में नियम-कायदों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि संघ में उन्हीं व्यक्तियों को सदस्य के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, जिनकी कारदार के रूप में नियुक्ति ‘वाजिब-उल-अर्ज’ तथा सक्षम प्राधिकारी के आधिकारिक रिकॉर्ड से प्रमाणित हो।

उन्होंने मांग की कि जिन सदस्यों की वैध नियुक्ति अथवा संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनकी सदस्यता की निष्पक्ष जांच की जाए और सत्यापन के बाद ही उनकी वैधानिक स्थिति निर्धारित की जाए।

उच्च न्यायालय के फैसलों का दिया हवाला

ओम प्रकाश शर्मा ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के विभिन्न मामलों, जिनमें CWP No. 4824/2009, CWP No. 8203/2011 और CWP No. 1978/2016 का उल्लेख करते हुए कहा कि कुल्लू घाटी में कारदार की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया में ‘वाजिब-उल-अर्ज’ और सक्षम राजस्व एवं प्रशासनिक प्राधिकारी के रिकॉर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने जिला प्रशासन से जिला कारदार संघ की पूरी सदस्यता सूची मंगवाकर उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से उसका स्वतंत्र और निष्पक्ष सत्यापन करवाने की मांग की, ताकि वास्तविक एवं वैध कारदारों की पहचान सुनिश्चित हो सके।

कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव न करवाने पर उठाए सवाल

जिला देवी-देवता कारदार संघ के पूर्व अध्यक्ष जय चंद ठाकुर ने कहा कि संघ के पिछले चुनाव 30 नवंबर 2021 को हुए थे। उनके अनुसार, तीन वर्ष का कार्यकाल 30 नवंबर 2024 को समाप्त हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई कार्यकारिणी के लिए चुनाव क्यों नहीं करवाए गए।

उन्होंने प्रशासन से संघ के संविधान, पंजीकरण संबंधी नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप चुनाव प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही पात्र सदस्यों की सत्यापित सूची तैयार कर उसके आधार पर निष्पक्ष चुनाव करवाने की बात कही।

उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग

देव संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट और पूर्व पदाधिकारियों ने उपायुक्त-सह-कलेक्टर कुल्लू से मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने प्रमुख रूप से जिला कारदार संघ की वर्तमान सदस्यता सूची मंगवाकर उसका आधिकारिक सत्यापन करवाने, ‘वाजिब-उल-अर्ज’ तथा सक्षम प्राधिकारी के नियुक्ति रिकॉर्ड के आधार पर वैध कारदारों का जिला-स्तरीय प्रमाणित रजिस्टर तैयार करने और सदस्यता व चुनाव प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच करवाने की मांग रखी।

इसके अलावा लागू नियमों के तहत निष्पक्ष एवं समयबद्ध चुनाव करवाने तथा जांच और चुनाव प्रक्रिया के दौरान संघ के प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को लेकर नियमों के अनुरूप स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

देव संस्कृति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता पर जोर

ट्रस्ट का कहना है कि कुल्लू की देव संस्कृति, देव परंपराओं, देव संपत्तियों और देव कोष से जुड़े मामलों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में जिला कारदार संघ की सदस्यता और प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान किया जाना आवश्यक है।

विधायक और पूर्व सांसद को लेकर भी उठाए सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने वर्तमान विधायक सुंदर सिंह ठाकुर और पूर्व सांसद महेश्वर सिंह को लेकर भी आरोप और सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजी प्रमाण सामने आना बाकी है।

ट्रस्ट ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि जिला कारदार संघ की सदस्यता, प्रतिनिधित्व और चुनाव प्रक्रिया को लेकर बनी स्थिति स्पष्ट हो सके।

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