ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को नियमों की स्पष्ट जानकारी जरूरी : अनिरुद्ध सिंह

29 सितंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

शिमला। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के उद्देश्य से डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासनिक संस्थान (एमसिप्पा), फेयरलॉन में छह जिलों के जिला विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यशाला मंगलवार को शुरू हुई। कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान करना तथा अधिकारियों को योजनाओं, नियमों और प्रक्रियाओं की अद्यतन जानकारी उपलब्ध करवाना है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में योजनाओं और नियमों की पर्याप्त जानकारी के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों तथा पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में कठिनाइयां आती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को विभागीय योजनाओं और उनके नियमों की स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है, ताकि विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनावश्यक बाधाएं न आएं और उपलब्ध बजट का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

हिम ई-पंचायत से पंचायत बैठकों में बढ़ेगी पारदर्शिता

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने कहा कि 25 सितंबर को आयोजित ओरिएंटेशन कार्यशाला के दौरान हिम ई-पंचायत प्रोसिडिंग सिस्टम पोर्टल लॉन्च किया गया था। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की बैठकों की कार्यवाही ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इससे पंचायत बैठकों की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ विभागीय रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से डिजिटल रूप में रखने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि हिम ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर राज्य स्तर तक के अधिकारी हिम एक्सेस के जरिए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (बीडीसी) और जिला परिषद की बैठकों का एजेंडा, बैठक का विवरण तथा कार्यवाही ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। इससे भौतिक रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और बैठकों से संबंधित महत्वपूर्ण डाटा डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा।

मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को नियमों और प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी न होने के कारण कई बार बजट का समुचित उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष ग्रामीण विकास विभाग के अधीन पंचायतें करीब 12 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं कर पाईं। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल कर विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

अनिरुद्ध सिंह ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का सही और प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।

उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित ओरिएंटेशन कार्यशाला के लिए चार दिन की अनुमति प्रदान करने के लिए एमसिप्पा के निदेशक का आभार व्यक्त किया।

शेष छह जिलों के अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग की योजनाओं की जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में भी इस तरह की कार्यशाला आयोजित की गई थी।

उन्होंने बताया कि 25 और 26 सितंबर को छह जिलों के अधिकारियों को विभाग की विभिन्न योजनाओं से संबंधित अद्यतन जानकारी एवं आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में मंगलवार से शुरू हुई दूसरी दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला में शेष छह जिलों के जिला विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को ग्रामीण विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा अन्य संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी प्रदान की जा रही है।

कार्यशाला में निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राघव शर्मा, निदेशक एमसिप्पा रुपाली ठाकुर, अतिरिक्त निदेशक प्रशांत सरकैक, हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र मोहन सहित विभिन्न जिलों के जिला विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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