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चंबा:
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के तीसा, बकाणी सहित अन्य कई विकास खंडों में मनरेगा के तहत किसानों को वितरित किए गए स्टोन फ्रूट के पौधों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर बागवानी विभाग के विशेषज्ञों से गुणवत्ता का सत्यापन कराए बिना ही पौधों का वितरण कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार कई मामलों में अधिकारियों ने प्रमाणित नर्सरियों के बजाय अप्रमाणित नर्सरियों से पौधे खरीदकर लाभार्थियों में बांट दिए। जांच के दौरान कई पौधे बिना जड़ों के मिले, जबकि बड़ी संख्या में पौधे सूखे, सड़े-गले और खराब गुणवत्ता के पाए गए। मामले में संबंधित विकास खंड अधिकारियों (बीडीओ) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
हजारों पौधों की हुई थी खरीद
जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 से पहले मनरेगा योजना के तहत हजारों स्टोन फ्रूट पौधों की खरीद की गई थी। प्रति पौधे की कीमत करीब 200 से 500 रुपये बताई जा रही है। इनकी खरीद पर मनरेगा की राशि खर्च की गई। नियमों के मुताबिक पौधों की गुणवत्ता का सत्यापन बागवानी विभाग के विशेषज्ञों से कराना अनिवार्य था, लेकिन कई मामलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
नियमों की अनदेखी के आरोप
मनरेगा के तहत किसानों में फलोत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टोन फ्रूट के पौधे वितरित किए गए थे। आरोप है कि कुछ विकास खंडों में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करते हुए अप्रमाणित नर्सरियों से पौधे खरीद लिए गए और बिना उचित जांच के लाभार्थियों को वितरित कर दिए गए।
जांच में इन पहलुओं की होगी पड़ताल
सरकार की ओर से जारी जांच में यह देखा जाएगा कि पौधों की खरीद, गुणवत्ता परीक्षण और वितरण के दौरान निर्धारित नियमों और मानकों का पालन किया गया था या नहीं। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार कुछ बीडीओ की पदोन्नति भी जांच पूरी होने तक प्रभावित हो सकती है।
सरकार का पक्ष
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासु ने कहा,
“मामले की जांच चल रही है। संबंधित बीडीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।”





