
खबर अभी अभी | 03 सितंबर 2026 | डिडवीं टिक्कर

डिडवीं टिक्कर। हिमाचल प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्राध्यापक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त उपनिदेशक जीवन शर्मा तथा सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य नरेश सोहड़ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को पूरा पेंशन एरियर अदा कर दिया गया है। दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के बयान को भ्रामक और अनुचित बताते हुए वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
जीवन शर्मा ने कहा कि वास्तविकता यह है कि 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को अब तक केवल 53 प्रतिशत पेंशन एरियर का ही भुगतान हुआ है। इसके अलावा रिवाइज्ड लीव इनकैशमेंट तथा इन पेंशनरों की 80 प्रतिशत ग्रेच्युटी का भुगतान भी वर्तमान सरकार की ओर से अभी तक नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि इन पेंशनरों को केवल 20 प्रतिशत ग्रेच्युटी वर्ष 2022 में तत्कालीन जयराम सरकार के कार्यकाल में अदा की गई थी। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से पूरा पेंशन एरियर अदा किए जाने का बयान पेंशनरों के बीच रोष का कारण बना हुआ है।
जीवन शर्मा और नरेश सोहड़ ने संयुक्त बयान में मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए क्लास-1 से क्लास-3 तक के पेंशनरों को अपने वायदे के अनुसार 80 प्रतिशत ग्रेच्युटी और रिवाइज्ड लीव इनकैशमेंट प्रदान करने की अधिसूचना जल्द जारी की जाए। उन्होंने कहा कि इससे लंबे समय से अपने हक की प्रतीक्षा कर रहे पेंशनरों को राहत और न्याय मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि पेंशनरों को अपने अधिकारों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि वित्त विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री को इन मामलों की वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं करवा रहे हैं और अधिसूचना जारी करने में लापरवाही बरती जा रही है।
उन्होंने कहा कि वित्त विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए मुख्यमंत्री को इन मामलों का कड़ा संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने चाहिए। उन्होंने सरकार से पेंशनरों की लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने और बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है।
जीवन शर्मा और नरेश सोहड़ ने कहा कि पेंशनरों ने लंबे समय तक सरकार की घोषणाओं और आश्वासनों का इंतजार किया है। अब सरकार को बयानबाजी के बजाय वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए लंबित भुगतान और अधिसूचनाओं को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए।





