हिमाचल का स्वाद पहुंचा जापान, सिड्डू और धाम ने जोड़े दो संस्कृतियों के दिल

7 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

जापान में हुई पारंपरिक हिमाचली धाम और सिड्डू की विशेष कार्यशाला, कुल्लू की शेफ आकांक्षा ठाकुर ने जापानी प्रतिभागियों को सिखाई हिमाचली पाक परंपरा

कुल्लू। सुशांत शर्मा। एक सफर ऐसा भी, जहां भाषा अलग थी, संस्कृति अलग थी, लेकिन स्वाद ने दिलों को जोड़ दिया। जापान में हिमाचल प्रदेश की समृद्ध पाक परंपरा और संस्कृति की अनोखी झलक उस समय देखने को मिली, जब पारंपरिक हिमाचली धाम और सिड्डू पर विशेष पाक कार्यशाला आयोजित की गई।

यह आयोजन महज खाना बनाने की कार्यशाला नहीं था, बल्कि हिमाचल की मिट्टी, पहाड़ों की खुशबू, सदियों पुरानी परंपराओं और स्थानीय स्वादों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की खूबसूरत पहल रही।

कुल्लू की आकांक्षा ठाकुर ने संभाली कमान

इस अंतरराष्ट्रीय पाक अनुभव का नेतृत्व हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के नगर क्षेत्र की रहने वाली शेफ आकांक्षा ठाकुर ने किया। उनके लिए यह पहला अंतरराष्ट्रीय फूड वर्कशॉप था और मंच था जापान।

आकांक्षा ठाकुर ने जापानी प्रतिभागियों को केवल हिमाचली व्यंजन बनाना ही नहीं सिखाया, बल्कि प्रत्येक व्यंजन के पीछे छिपी कहानी, परंपरा और हिमाचली संस्कृति से भी परिचित कराया।

कार्यशाला में करीब 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने दोपहर और रात के भोजन में पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों का स्वाद लिया।

थाली में सजा हिमाचल

कार्यशाला में हिमाचली लाल चावल यानी जस्तू चावल, कड़ू का खट्टा, पारंपरिक सिड्डू, स्थानीय राजमा और मीठे चावल परोसे गए।

हर व्यंजन हिमाचल की अलग पहचान को सामने ला रहा था। पहाड़ी स्वाद की सादगी और पारंपरिक मसालों ने जापानी प्रतिभागियों को खासा प्रभावित किया।

सिड्डू बना खास आकर्षण

कार्यशाला का सबसे खास आकर्षण पारंपरिक सिड्डू रहा। प्रतिभागियों को सिड्डू बनाने की पूरी प्रक्रिया से परिचित कराया गया। आटा तैयार करने से लेकर इसे भाप में पकाने तक की पारंपरिक विधि के साथ-साथ हिमाचली संस्कृति में सिड्डू के महत्व की भी जानकारी दी गई।

सिड्डू बनाने की पूरी प्रक्रिया ने जापानी प्रतिभागियों में विशेष जिज्ञासा पैदा की। उन्होंने हिमाचली खान-पान की परंपराओं और स्थानीय सामग्रियों के बारे में भी उत्सुकता से जानकारी ली।

स्वाद ने मिटाई भाषाई और सांस्कृतिक दूरी

कार्यशाला के दौरान जापानी प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया ने आयोजन को और खास बना दिया। हिमाचली भोजन के अनोखे स्वाद, पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय सामग्रियों ने उन्हें बेहद प्रभावित किया।

उनकी रुचि केवल भोजन तक सीमित नहीं रही। प्रतिभागियों ने हिमाचल की जीवनशैली, परंपराओं और खाद्य संस्कृति को करीब से समझने में भी दिलचस्पी दिखाई।

यही भोजन की असली ताकत है—एक प्लेट खाना दो अलग संस्कृतियों के बीच रिश्ते की शुरुआत कर सकती है।

पहली अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला बनी यादगार उपलब्धि

शेफ आकांक्षा ठाकुर के लिए यह अनुभव गर्व और भावनाओं से भरा रहा। पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने राज्य के पारंपरिक व्यंजनों को प्रस्तुत करना और जापान के लोगों के साथ हिमाचल की संस्कृति एवं स्वाद साझा करना उनके लिए यादगार उपलब्धि बनी।

आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिभागियों ने भविष्य में भी इस तरह के और आयोजन करने की इच्छा जताई। साथ ही शेफ आकांक्षा ठाकुर और उनकी टीम को दोबारा जापान आने का निमंत्रण भी दिया गया।

हिमालय से जापान तक पहुंचा हिमाचली स्वाद

यह आयोजन सिर्फ एक फूड वर्कशॉप नहीं था, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने की एक खूबसूरत शुरुआत रही।

जहां शब्द कम पड़े, वहां स्वाद ने बात की। जहां दूरियां थीं, वहां परंपराओं ने पुल बनाया। और जहां दो संस्कृतियां मिलीं, वहां एक नई कहानी जन्मी।

हिमालय से जापान तक—स्वाद की यात्रा, संस्कृति का संवाद और परंपराओं का खूबसूरत मिलन।

हिमाचल का स्वाद… अब दुनिया के साथ।

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