बागवानी क्षेत्र की व्यवस्थाओं पर संदीपनी भारद्वाज ने उठाए सवाल, कहा- MIS भुगतान से लेकर भंडारण और विपणन तक स्थिति स्पष्ट करे सरकार

1 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र की व्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादकों को मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के पुराने भुगतान से लेकर भंडारण और विपणन तक कई स्तरों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से बागवानों के सामने इससे संबंधित वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की।

भारद्वाज ने कहा कि इस वर्ष MIS के तहत सी-ग्रेड सेब की खरीद में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक करीब 10 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब एक लाख मीट्रिक टन रहा था। हालिया रिपोर्टों में इस वर्ष की खरीद को पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर बताया गया है। हालांकि, कम उत्पादन और खुले बाजार में अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों को भी इस गिरावट के प्रमुख कारणों में बताया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 3.5 करोड़ सेब पेटियों का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष उत्पादन दो करोड़ पेटियों के शुरुआती अनुमान तक भी पहुंचने की संभावना कम बताई गई है। वहीं, MIS के तहत इस वर्ष करीब 18 हजार बागवानों ने पंजीकरण कराया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 45 हजार थी। HPMC के अनुसार इस वर्ष MIS खरीद प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और निगरानी को बेहतर बनाना है।

भारद्वाज ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि MIS में पंजीकरण और खरीद में आई गिरावट के पीछे कम फसल, खुले बाजार में कीमतें और नई ऑनलाइन व्यवस्था का कितना-कितना प्रभाव रहा है। HPMC की आधिकारिक MIS व्यवस्था में किसानों के पंजीकरण, फसल सूचना और खरीद भुगतान को डिजिटल माध्यम से ट्रैक करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

पुराने MIS भुगतान पर सरकार से जवाब मांगा

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने जुलाई में पुराने MIS बकाये के भुगतान के लिए 45 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की थी। इसके बाद भी कई बागवानों के भुगतान लंबित रहने की शिकायतें सामने आई हैं। जुलाई में सरकार की ओर से 45 करोड़ रुपये जारी किए जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई थी।

उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले वर्ष के MIS का कुल कितना भुगतान अभी लंबित है, कितने बागवानों को भुगतान किया जा चुका है और कितने मामलों में दस्तावेज या जांच की प्रक्रिया के कारण भुगतान रुका हुआ है।

भारद्वाज ने कहा कि बागवानों को घोषणाओं के बजाय समय पर उनके खातों में भुगतान चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि पिछली MIS खरीद से संबंधित रिकॉर्ड में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही, जांच की प्रक्रिया के कारण वास्तविक बागवानों के वैध भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

CA स्टोर की क्षमता के साथ वास्तविक उपयोग के आंकड़े भी जारी करने की मांग

संदीपनी भारद्वाज ने कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोरेज को लेकर भी सरकार से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल CA स्टोर की कुल क्षमता बताने से बागवानों को वास्तविक लाभ का आकलन नहीं हो सकता।

उन्होंने सरकार से मांग की कि यह बताया जाए कि मौजूदा सीजन में सरकारी CA स्टोर्स में वास्तव में कितने बागवानों ने कितनी मात्रा में सेब रखा, उन्हें किस दर पर सुविधा उपलब्ध हुई और बाद में उनकी उपज किस औसत कीमत पर बिकी।

उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भंडारण व्यवस्था का लाभ वास्तव में बागवानों तक पहुंचा या नहीं।

सेब हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

भारद्वाज ने कहा कि सेब हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी विवरणों के अनुसार, सेब राज्य के कुल फल उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत और फल क्षेत्रफल में करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि MIS के लंबित भुगतान, वर्षवार खरीद, पंजीकृत बागवानों की संख्या, CA स्टोर की वास्तविक उपयोग क्षमता और बागवानों को मिले लाभ से संबंधित विस्तृत स्थिति पत्र सार्वजनिक किया जाए।

भारद्वाज ने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि बागवानों को उनकी फसल का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, सुरक्षित भंडारण और पारदर्शी विपणन व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से उपलब्ध हो रही है।

Share the news