
7 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर चुनाव प्रक्रिया को सही बताती है, जबकि हार मिलने पर चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है। उन्होंने इसे चुनावी हार की जिम्मेदारी संस्थाओं पर डालने की कोशिश बताया।
कश्यप ने कहा कि 6 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार राजनीतिक सवाल उठाना उचित नहीं है।
हिमाचल के नगर निगम चुनावों का दिया उदाहरण
सुरेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस को हिमाचल के हालिया नगर निगम चुनावों के परिणामों पर भी विचार करना चाहिए। उनके अनुसार मई 2026 में हुए चार नगर निगम चुनावों में भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को पालमपुर में सफलता मिली।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय और जिला परिषद के चुनावों में भी कई स्थानों पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में हर चुनावी हार के लिए EVM या चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने के बजाय कांग्रेस को जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
SIR को लेकर कांग्रेस से सवाल
कश्यप ने कहा कि मतदाता सूची का सत्यापन और उसका अद्यतन होना निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि प्रक्रिया में किसी पात्र मतदाता के अधिकार से जुड़ी ठोस आपत्ति है तो उसे प्रमाणों के साथ चुनाव आयोग के समक्ष रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारियों का किया उल्लेख
सुरेश कश्यप ने कांग्रेस और चुनाव आयोग के पूर्व पदाधिकारियों के राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एम.एस. गिल बाद में कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य बने और यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का भी उल्लेख किया।
कश्यप ने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “जीते तो जनादेश, हारे तो चुनाव आयोग दोषी” वाली राजनीति लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि है और कांग्रेस को SIR के नाम पर भ्रम फैलाने के बजाय जनादेश का सम्मान करना चाहिए।





