लाहौल-स्पीति और कुल्लू की समृद्ध विरासत को सहेजने की पहल, कुल्लू में सजी विशेष पुस्तक प्रदर्शनी

31 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | कुल्लू

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के समापन के बाद कुल्लू में सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों को नई गति देने की पहल की गई है। लाहौल-स्पीति और कुल्लू के बुद्धिजीवियों की ओर से ज्ञान, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित विशेष पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। यह पुस्तक मेला 9 नवंबर तक चलेगा।

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों में पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्रों के इतिहास, लोकसंस्कृति, परंपराओं और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करना है।

आयोजक रामनाथ ने बताया कि दशहरा उत्सव के बाद के समय को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने और समाज में पढ़ने-लिखने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है।

उन्होंने कहा कि लाहौल-स्पीति और कुल्लू का इतिहास, लोकसंस्कृति और परंपराएं बेहद समृद्ध हैं। इस विरासत को पुस्तकों के माध्यम से सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

रामनाथ ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल पुस्तकों को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक तथ्यों और बौद्धिक विरासत से परिचित करवाना भी है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी पुस्तकों के माध्यम से अपने क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को समझ सकेगी।

आयोजकों ने कुल्लू, लाहौल-स्पीति और आसपास के क्षेत्रों के पुस्तक प्रेमियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों तथा इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों से 9 नवंबर तक प्रदर्शनी में पहुंचने की अपील की है।

आयोजकों का मानना है कि पुस्तकों के माध्यम से अपनी जड़ों, इतिहास और संस्कृति को समझने की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

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