
4 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | मंडी

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग स्थित गोहर (गुडाहरी) की ओर से सराज विकास खंड की शरण, पखरैर और थुनाग पंचायतों में आपदा जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। 2, 3 और 4 नवंबर को आयोजित इन कार्यक्रमों में तीनों पंचायतों के कुल 75 लोगों ने भाग लिया।
ये कार्यक्रम “हिमाचल प्रदेश में आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए हिमालयी समुदायों का सशक्तिकरण” परियोजना के तहत आयोजित किए गए। इस दौरान महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक (पर्यावरण विज्ञान) एवं परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ. कशिश वालिया ने प्रतिभागियों को आपदा-प्रतिरोधी समुदायों के निर्माण और जोखिम कम करने के उपायों की जानकारी दी।
डॉ. वालिया ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र अपनी भौगोलिक एवं जलवायु संबंधी परिस्थितियों के कारण प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में स्थानीय समुदायों को जागरूक, प्रशिक्षित और तैयार करना जरूरी है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में जन-धन के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
उन्होंने आपदा से पहले संभावित जोखिमों की पहचान, सुरक्षित स्थानों एवं निकासी मार्गों की जानकारी रखने, आपातकालीन किट तैयार करने और जरूरी दस्तावेजों व दवाइयों को सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया। आपदा के दौरान संयम बनाए रखने, प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी। वहीं, आपदा के बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देने, प्रभावित लोगों की मदद करने तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासन या सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जागरूकता, सामूहिक प्रयास और स्थानीय संसाधनों के उचित उपयोग से आपदाओं के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वर्ष 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने उस दौरान सामने आई चुनौतियों, नुकसान, राहत एवं बचाव कार्यों और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में प्रत्येक पंचायत से 25 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने अपने गांवों और पंचायतों में आपदा जोखिम कम करने के लिए सामूहिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।





