
4 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | सुंदरनगर (मंडी)

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिव्यांगजनों को अपनी प्रतिभा और क्षमता का पूरा प्रदर्शन करने के लिए सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों।
राज्यपाल बुधवार को सुंदरनगर में स्पेशल ओलंपिक्स भारत, हिमाचल प्रदेश की ओर से आयोजित ‘दीपावली उत्सव-2026 : विशेष बच्चों की क्षमताओं का उत्सव’ कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हिमाचल प्रदेश के विशेष खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में प्रदेश के विशेष खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन पूरे हिमाचल और देश के लिए गर्व की बात है। उनकी उपलब्धियां दृढ़ संकल्प, समावेशिता और उत्कृष्टता का उदाहरण हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समावेशी विकास और समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी को दी जा रही प्राथमिकता का भी उल्लेख किया।
उन्होंने वर्ष 2015 में विशेष ओलंपिक पदक विजेताओं को केंद्र सरकार की नकद पुरस्कार योजना में शामिल करने के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में योजना में किए गए संशोधन से भी दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों को पहचान और प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।
वर्ल्ड विंटर गेम्स के पदक विजेताओं को किया सम्मानित
राज्यपाल ने इटली के ट्यूरिन में आयोजित वर्ल्ड विंटर गेम्स में हिमाचल के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए पदक विजेताओं शालिनी, अनिल कुमार, आकृति, गिरिधर और हेमचंद को बधाई दी। उन्होंने शिवांजलि और शुभम के प्रदर्शन की भी प्रशंसा की।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सात खिलाड़ियों और चार प्रशिक्षकों को वर्ल्ड विंटर गेम्स में भाग लेने का अवसर मिला। खिलाड़ियों को तैयार करने में एनएचपीसी, बीबीएमबी, प्रशिक्षकों, संस्थानों और परिवारों के योगदान की भी उन्होंने सराहना की।
राज्यपाल ने चेतना संस्था, साकार स्पेशल स्कूल, सहयोग स्पेशल स्कूल, सीआरसी और अन्य संस्थानों के बच्चों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रशंसा की। उन्होंने स्पेशल ओलंपिक्स भारत के ‘ईच वन-रीच वन’ संदेश का उल्लेख करते हुए परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों से समावेशिता के अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
विशेष बच्चों के उत्पाद खरीदकर करें प्रोत्साहित
प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने लोगों से प्रदर्शनी में विशेष बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद खरीदने और उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों को बढ़ावा देने से बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास को मजबूती मिलेगी। साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।
स्पेशल ओलंपिक्स भारत की अध्यक्ष डॉ. मलिका नड्डा ने कहा कि संस्था ‘इन्क्लूजन रिवोल्यूशन’ अभियान के माध्यम से बौद्धिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम कर रही है। खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी पहलों के जरिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर दिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों ने वर्ष 2023 में बर्लिन में आयोजित वर्ल्ड समर गेम्स में 202 पदक जीते थे, जबकि वर्ष 2025 में इटली में आयोजित वर्ल्ड विंटर गेम्स में भारतीय दल ने 33 पदक हासिल किए। इनमें हिमाचल प्रदेश के 15 खिलाड़ियों ने 22 पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। डॉ. नड्डा ने 28 खिलाड़ियों को कुल 2.56 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान करने के लिए युवा मामले एवं खेल मंत्रालय का आभार जताया। उन्होंने खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सुलभ और आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज त्रिपाठी ने बोर्ड की गतिविधियों, प्रदेश के विकास में योगदान और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। स्पेशल ओलंपिक्स भारत, जिला मंडी चैप्टर के अध्यक्ष जगदीश राणा ने राज्यपाल का स्वागत किया और कार्यक्रम की जानकारी दी।
इस अवसर पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, बीबीएमबी और जिला प्रशासन के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।





