
10 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | चैल चौक, मंडी

चैल चौक। युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े शिक्षा, रोजगार और समान अवसर के मुद्दों को लेकर चैल चौक में यूजीसी के खिलाफ जोरदार रैली निकाली गई। रैली में युवाओं और विद्यार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर तथा न्याय सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से उठाना चाहिए। वक्ताओं ने सवाल किया कि सामान्य वर्ग के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले युवाओं, विद्यार्थियों और नौकरी के अभ्यर्थियों के अधिकारों को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले नेता कितने हैं।
चुनावी समर्थन से आगे युवाओं के मुद्दों पर संघर्ष की मांग
रैली में वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के समय युवाओं से समर्थन मांगना आसान है, लेकिन शिक्षा, रोजगार और समान अवसर जैसे मुद्दों पर उनके साथ खड़ा होना भी जरूरी है। युवाओं का कहना है कि उनके भविष्य से जुड़े विषयों को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और रोजगार में अवसरों की उपलब्धता तथा प्रक्रिया में पारदर्शिता युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। आर्थिक रूप से कमजोर और मेहनतकश परिवारों से आने वाले युवाओं को आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर मिलना चाहिए।
मुद्दा केवल जाति का नहीं, युवाओं के भविष्य का
रैली में यह मुद्दा भी उठाया गया कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों को लेकर चर्चा केवल जातिगत आधार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को भी चर्चा के केंद्र में लाया जाना चाहिए।
युवाओं ने मांग रखी कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
जनप्रतिनिधियों से युवाओं के साथ खड़े होने की अपील
रैली में शामिल युवाओं ने जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे युवाओं की समस्याओं और अधिकारों को गंभीरता से उठाएं। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को केवल चुनाव के समय याद करने के बजाय उनके शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर लगातार आवाज उठाने की जरूरत है।
रैली के माध्यम से युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा, रोजगार और समान अवसर उनके भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।





