पिरनगाह मंदिर के अधिकार को लेकर विवाद, भाजपा ने सरकार और पूर्व विधायक पर साधा निशाना

7/8/2026
ऊना, बसोली
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बसोली ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में स्थित पिरनगाह मंदिर के प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब 50 वर्षों से मंदिर का संचालन और रखरखाव ग्राम पंचायत करती रही है तथा न्यायालय ने भी मंदिर के प्रबंधन का अधिकार पंचायत को दिया है। इसके बावजूद पंचायत भंग होने के दौरान मंदिर का चार्ज बीडीओ को सौंपा गया, जिसे नई पंचायत के गठन के बाद भी वापस नहीं दिया जा रहा।

भाजपा नेता सतपाल सती का कहना है कि हाल ही में दूसरी बार निर्वाचित प्रधान सतनाम सिंह ने प्रेस वार्ता कर मंदिर ट्रस्ट के करीब 22 करोड़ रुपये के व्यय का विस्तृत हिसाब सार्वजनिक किया। उनके अनुसार यह राशि छात्र कल्याण, गरीब एवं बीमार लोगों की सहायता, नवजात बेटियों के सम्मान, विधवा महिलाओं की पेंशन, कन्याओं के विवाह सहायता, रोजगार सृजन तथा अन्य सामाजिक कार्यों पर खर्च की गई है। उन्होंने दावा किया कि गांव को सीधे तौर पर मिलने वाली राशि लगभग 25 लाख रुपये थी, जबकि शेष धनराशि मंदिर की आय से जनकल्याण कार्यों में उपयोग की गई।

भाजपा ने पूर्व विधायक सतपाल रायजादा द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को भ्रामक बताते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही आरोप लगाया कि मंदिर के प्रबंधन को सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे गांव में वर्षों से चल रही जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

भाजपा नेता सतपाल सती ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए मंदिर का प्रबंधन पुनः ग्राम पंचायत को सौंपने की मांग की। उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में अनावश्यक सरकारी हस्तक्षेप से स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्षता बरतने और गांव के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।

भाजपा ने पूर्व विधायक सतपाल रायजादा से भी राजनीतिक टकराव से बचने और गांव के हित में समाधान निकालने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि पंचायत किसी भी दल की हो, मंदिर का प्रबंधन और उससे होने वाले जनकल्याण कार्य गांव के अधिकार में ही रहने चाहिए।

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