मंत्री जगत सिंह नेगी ने लाहौल घाटी के शुगू में ब्लूबेरी की खेती का किया निरीक्षण

केलांग (लाहौल-स्पीति)
दिनांक: 22 अक्टूबर 2026
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राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने पांगी दौरे से लौटते समय लाहौल घाटी के शुगू क्षेत्र का दौरा कर वहां की जा रही ब्लूबेरी की खेती का निरीक्षण किया। इस अवसर पर बागवानी विभाग की उपनिदेशक मीनाक्षी शर्मा भी उनके साथ उपस्थित रहीं। मंत्री ने ब्लूबेरी के पौधों की स्थिति देखकर किसान द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और इसे घाटी में बागवानी के क्षेत्र में एक नई व आशाजनक संभावना बताया।

किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश
मंत्री जगत सिंह नेगी ने बागवानी विभाग को निर्देश दिए कि लाहौल घाटी में ब्लूबेरी की खेती को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक किसानों और बागवानों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा:

“ब्लूबेरी जैसी उच्च मूल्य (High Value) वाली फसल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विभाग किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करे, ताकि घाटी में बागवानी के नए विकल्प विकसित किए जा सकें।”

प्रगतिशील बागवान प्रताप चंद की सराहनीय पहल
लाहौल घाटी में ब्लूबेरी के उत्पादन की दिशा में एक अनूठी और महत्वपूर्ण पहल की गई है:

गौंधला के प्रगतिशील बागवान प्रताप चंद ने बागवानी विभाग के प्रशिक्षण और सहयोग से 500 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में ब्लूबेरी के 500 पौधे सफलतापूर्वक उगाए हैं।

इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने में लगभग 12.50 लाख रुपये की लागत आई है।

सरकार एवं बागवानी विभाग द्वारा बागवान को 9,37,500 रुपये का अनुदान (Subsidy) प्रदान किया गया है।

यह पहल दर्शाती है कि कम भूमि में भी वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके उच्च मूल्य वाली फसलों का बेहतरीन उत्पादन किया जा सकता है।

लाहौल की जलवायु और प्रीमियम बाजार का लाभ
ब्लूबेरी को देश में एक प्रीमियम फल माना जाता है और भारतीय बाजार में इसकी मांग काफी अधिक है। लाहौल घाटी की विशेष जलवायु और अनुकूल परिस्थितियों के कारण इसकी खेती किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोल सकती है।

मंत्री ने कहा कि घाटी के किसान नई तकनीकों और वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि ब्लूबेरी की खेती के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए और इच्छुक बागवानों को हर संभव सहायता दी जाए, ताकि भविष्य में लाहौल घाटी को ब्लूबेरी उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बनाया जा सके।

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