
सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना की जाँच को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए नकली दवाओं के कथित रैकेट की विजिलेंस जाँच में असमर्थता जताए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर हिमकेयर मामले में सरकार जाँच को लेकर तत्परता दिखा रही है, जबकि दूसरी ओर नकली दवाओं और कथित जीएसटी चोरी जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले की जाँच से विजिलेंस द्वारा असमर्थता जताई जा रही है।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि हाई कोर्ट के निर्देश के बाद भी विजिलेंस द्वारा जाँच में असमर्थता जताने के पीछे क्या मंशा है। उन्होंने कहा कि यदि विजिलेंस के पास पर्याप्त मैनपावर, संसाधन तथा राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी और डोमेन ज्ञान का अभाव है, तो हिमकेयर की जाँच के लिए यह तकनीकी और वित्तीय ज्ञान कहाँ से आ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिमकेयर को बदनाम करने के नाम पर सरकार द्वारा जाँच का नाटक किया जा रहा है, जबकि प्रदेश में लोगों की जान से जुड़े नकली दवाओं के कथित रैकेट की जाँच से एजेंसी पीछे हट रही है। उन्होंने पूछा कि क्या प्रदेश की जाँच एजेंसी वास्तव में इस मामले की जाँच करने में असमर्थ है या सरकार की जाँच कराने की इच्छा ही नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, एक दवा निर्माता पर नकली दवा की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में न्यायालय में दिए गए एक अन्य प्रतिनिधित्व के माध्यम से कथित तौर पर 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में विस्तृत जाँच की माँग की गई थी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा नेताओं और सरकार के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ विजिलेंस द्वारा तेजी से कार्रवाई और पूछताछ की जाती है, लेकिन इतने गंभीर वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी आरोपों वाले मामले में जाँच से असमर्थता जताई जा रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी तकनीकी और वित्तीय जानकारी की कमी है, जिसके कारण विजिलेंस और पुलिस विभाग को जाँच से पीछे हटना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यदि जीएसटी और नकली दवाओं से जुड़े मामलों की जाँच के लिए तकनीकी ज्ञान उपलब्ध नहीं है, तो विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किए गए चिकित्सकीय निर्णयों की समीक्षा के लिए यह विशेषज्ञता कहाँ से आ गई। उन्होंने हिमकेयर से जुड़े मामलों की जाँच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के बयानों को सही साबित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर इस मामले की जाँच करने में अपनी असमर्थता जताई थी। उनके अनुसार, ब्यूरो ने मामले की वित्तीय प्रकृति को जटिल बताते हुए पर्याप्त मैनपावर, संसाधनों तथा राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी और डोमेन ज्ञान की कमी का हवाला दिया था।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इतनी व्यापक कथित वित्तीय हेराफेरी की जाँच से पीछे हटना सरकार के दावों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे प्रदेश सरकार के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावे से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सरकार सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मामलों में कार्रवाई करने से बच रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब सरकार की कार्यप्रणाली को समझ चुकी है और नकली दवाओं जैसे गंभीर मामलों में निष्पक्ष एवं प्रभावी जाँच की आवश्यकता है।





