जीसी पनारसा में शिक्षकों के लिए जीवन कौशल पर संवादात्मक कार्यशाला आयोजित

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कुल्लू (पनारसा )
राजकीय महाविद्यालय पनारसा के मानसिक स्वास्थ्य एवं परामर्श प्रकोष्ठ द्वारा शनिवार को महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों के लिए जीवन कौशल (लाइफ स्किल्स) विषय पर एक गतिविधि-आधारित संवादात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विभिन्न गतिविधियों एवं चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सत्यव्रत वैद्य, नोडल हेड, एटीएफ, भुंतर रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं को समझने तथा उन्हें बेहतर शिक्षण अनुभव प्रदान करने में जीवन कौशल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को धीमी गति से सीखने वाले तथा मेधावी—दोनों प्रकार के विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को समझते हुए उनकी सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षण पद्धतियाँ अपनानी चाहिए।

डॉ. वैद्य ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नए दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने सुविधा-क्षेत्र (कम्फर्ट ज़ोन) से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि शिक्षक विद्यार्थियों को भी अपनी झिझक दूर करने, आत्मविश्वास विकसित करने तथा जीवन कौशल अर्जित करने के लिए प्रेरित करें, ताकि शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया अधिक सकारात्मक, प्रभावी, रचनात्मक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बन सके।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. उर्सेम लता ने डॉ. सत्यव्रत वैद्य का इस प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक सत्र के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्राध्यापकों ने भी इस संवादात्मक एवं गतिविधि-आधारित सत्र की सराहना की।

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