मुख्यमंत्री ने 4 साल में उद्योगपतियों से एक बैठक तक नहीं की, ये अहंकार नहीं तो क्या है: राजेंद्र राणा

सोलन
दिनांक: 22 अक्टूबर 2026
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प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश के औद्योगिक हब बद्दी-नालागढ़ की बदहाली को लेकर कांग्रेस सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बद्दी आज केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि हिमाचल के हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का केंद्र है। वहां फार्मा सहित सैकड़ों उद्योग लगे हैं, लेकिन सरकार के नकारात्मक रवैये से आज निवेशक भी चिंतित हैं और उद्योगपति परेशान हैं।

बद्दी में बुनियादी सुविधाओं का संकट
राजेंद्र राणा ने कहा कि बद्दी में वर्तमान में तीन बड़ी समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं:

जर्जर सड़कें: सड़कों की हालत इतनी खराब है कि वहां घंटों जाम लगा रहता है।

बिजली संकट: दिन में ही घंटों बिजली के कट लग रहे हैं और हफ्ते में एक दिन पूरा शटडाउन किया जा रहा है। अपनी बिजली होते हुए भी उद्योगों को बिजली नहीं मिल रही है और सरकार बाहर बिजली बेच रही है।

प्रशासनिक परेशानियां: फायर एनओसी जैसी सामान्य प्रक्रिया के लिए भी उद्योगपतियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर कड़े सवाल
मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इससे पहले चाहे भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की, हर मुख्यमंत्री साल में एक-दो बार बद्दी-नालागढ़ की एसोसिएशन के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनता था। लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री को 4 साल हो गए, उन्होंने उद्योगपतियों के साथ एक बैठक तक करना उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा, “अगर मेहनत से पद मिला हो तो व्यक्ति प्रदेश के बारे में सोचता है।”

राणा ने आगे कहा कि जिन विधायकों ने मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में नेतृत्व और समर्थन दिया, उन सभी विधायकों के बारे में पार्टी छोड़ने जैसी टिप्पणी करने वाले मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता का भला क्या करेंगे और उन पर कौन भरोसा करेगा?

नया निवेश लाने में सरकार विफल
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार के पास नया निवेश लाने का कोई विजन नहीं है, जबकि पड़ोसी राज्य लगातार नई नीतियां ला रहे हैं। हिमाचल पर हजारों करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और औद्योगिक क्षेत्र में केवल चुनिंदा चहेतों को लाभ पहुंचाने की नीति पर काम हो रहा है। उन्होंने अंत में कहा कि पंचायत चुनावों में जनता ने अपना संकेत दे दिया है और आगामी विधानसभा चुनावों में भी जनता कड़ा निर्णय सुनाएगी।

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