निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल, कांग्रेस प्रवक्ता नवनीत सूद ने केंद्र सरकार को घेरा

KHABAR ABHI ABHI
30/10/2026
KULLU
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राज्य प्रवक्ता एवं मीडिया पैनलिस्ट नवनीत सूद ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लगातार प्रयास हो रहे हैं और भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

नवनीत सूद ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश के लोकतंत्र की आधारशिला है और स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव करवाना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निर्धारित अंतरिम व्यवस्था में दिसंबर 2023 के कानून के जरिए बदलाव किया गया। इस कानून के तहत चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव के बाद चयन समिति में केंद्र सरकार के दो प्रतिनिधि हो गए, जबकि विपक्ष का प्रतिनिधित्व केवल एक सदस्य तक सीमित रह गया। कांग्रेस ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए नुकसानदायक बताया था।

नवनीत सूद के अनुसार, फरवरी 2025 में इसी कानून के तहत ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति पत्र देकर सर्वोच्च न्यायालय में कानून की संवैधानिक वैधता पर फैसला आने तक नियुक्ति स्थगित रखने की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी सवाल उठाए। सूद ने कहा कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुई इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार को लेकर चिंताएं सामने आईं।

उन्होंने सितंबर 2026 में प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR से जुड़े फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। उनके मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया, चुनावी आंकड़ों तक पहुंच और मतदाता सूचियों से नाम हटाने एवं दोबारा शामिल करने जैसे मुद्दे शामिल थे।

नवनीत सूद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई है और मामला बड़ी पीठ के विचारार्थ भेजा गया है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निर्वाचन आयोग का स्वतंत्र और निष्पक्ष रहना बेहद आवश्यक है।

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