
4 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | नौणी (सोलन)

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने संस्थागत विकास को नई दिशा देते हुए अनुसंधान, उद्यमिता, नवाचार और शैक्षणिक विस्तार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। बुधवार को विश्वविद्यालय में नई सुविधाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली कई भावी परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारियों, विभागाध्यक्षों और वैज्ञानिकों की उपस्थिति में इन परियोजनाओं का शुभारंभ किया।
उद्यमिता और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से स्थापित कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर के प्रसंस्करण केंद्र का कुलपति ने वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। यहां मशरूम, सब्जियों, फलों, मसालों और औषधीय जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह केंद्र उत्पाद विकास, मूल्य संवर्धन और कौशल प्रशिक्षण के साथ खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करेगा। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, किसानों और नए उद्यम शुरू करने के इच्छुक युवाओं को लाभ मिलेगा।
वाइन निर्माण से जुड़ी तकनीकों में अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण को मजबूत करने के लिए एनोलॉजी प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया। इसके अलावा औषधीय एवं उपयोगी वनस्पतियों से उत्पाद विकसित करने और उनके विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर्बल उत्पाद विकास एवं विक्रय केंद्र शुरू किया गया।
विश्वविद्यालय के हर्बेरियम (पादप संग्रहालय) के डिजिटलीकरण की सुविधा का भी शुभारंभ किया गया। इससे बहुमूल्य पादप नमूनों और उनसे संबंधित वैज्ञानिक जानकारी का संरक्षण तथा उपलब्धता आसान होगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्तपोषण से स्थापित कैनबिस (भांग) अनुसंधान केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यह केंद्र औषधीय प्रयोजनों के लिए कैनबिस के वैज्ञानिक अध्ययन, गुणवत्ता मूल्यांकन, संरक्षण और सतत उपयोग पर काम करेगा। वहीं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) नीति केंद्र के माध्यम से नीतिगत अनुसंधान और सार्वजनिक संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
विद्यार्थियों के विकास के लिए नई सुविधाएं
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए सत्यनंद स्टोक्स पुस्तकालय में ब्रह्माकुमारी संस्थान के सहयोग से स्थापित ‘थॉट लैब’ का उद्घाटन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, चिंतन और विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच उपलब्ध करवाना है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सिस्टर सुषमा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त छात्र कल्याण संगठन के अंतर्गत प्रत्येक छात्रावास में स्थापित ‘सुख-संसार रीडिंग एंड स्टडी लाउंज’ का भी उद्घाटन किया गया। इन लाउंज के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई और बौद्धिक विकास के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।
कई उत्कृष्टता केंद्रों की रखी आधारशिला
विश्वविद्यालय ने भविष्य की अनुसंधान और शैक्षणिक जरूरतों को देखते हुए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्लांट टिश्यू कल्चर सुविधा, बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में हिमालयी पारंपरिक बीज विरासत केंद्र और सिल्वीकल्चर एवं कृषि वानिकी विभाग में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ उत्कृष्टता केंद्र शामिल हैं।
कीट विज्ञान विभाग में मधुमक्खी अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र की भी आधारशिला रखी गई। इन परियोजनाओं से जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, पारंपरिक बीजों के संरक्षण, अपशिष्ट पदार्थों के उपयोग और मधुमक्खी पालन से जुड़े अनुसंधान एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
दूरस्थ शिक्षा और वैश्विक संपर्क पर जोर
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहुंच बढ़ाने के लिए दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षण केंद्र की आधारशिला रखी गई। इसके माध्यम से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों और विशेषज्ञता को देश-विदेश के विद्यार्थियों तथा पेशेवरों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में प्रशिक्षण, प्लेसमेंट एवं वैश्विक संपर्क उत्कृष्टता केंद्र की भी आधारशिला रखी गई। इससे उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में सुधार करने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के अवसर उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा कृषि संग्रहालय की आधारशिला रखी गई। यहां कृषि, बागवानी और वानिकी के विकासक्रम तथा समाज और अर्थव्यवस्था में इनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।
आत्मनिर्भर और वैश्विक संस्थान बनाने की दिशा में पहल : कुलपति
कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने कहा कि ये पहल केवल नए भवनों और भौतिक सुविधाओं के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वविद्यालय के समग्र विकास की व्यापक सोच को दर्शाती हैं। इनक्यूबेशन और प्रसंस्करण सुविधाओं, विशिष्ट अनुसंधान केंद्रों, डिजिटल शिक्षा, उद्योगों के साथ साझेदारी और विद्यार्थी विकास में निवेश से विश्वविद्यालय अपनी गतिविधियों में विविधता लाने और अतिरिक्त संसाधन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा मजबूत होगी और वित्तपोषण के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। ये पहल विश्वविद्यालय को अधिक आत्मनिर्भर, नवाचार आधारित और वैश्विक स्तर पर जुड़ी संस्था बनाने के साथ-साथ बागवानी, वानिकी और संबद्ध क्षेत्रों के विकास में उसके योगदान को और सशक्त करेंगी।





