जिला कारागार कुल्लू में आध्यात्मिक चिंतन कार्यक्रम, ‘अंतर्क्रांति’ के तहत बंदियों को दिया सकारात्मक जीवन का संदेश

6 अक्तूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | कुल्लू

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से संचालित बंदी सुधार एवं पुनर्वास कार्यक्रम ‘अंतर्क्रांति’ के तहत जिला कारागार कुल्लू में आध्यात्मिक चिंतन एवं भजन-कीर्तन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना से हुआ। साध्वी गुरुगीता भारती और साध्वी कंचन भारती ने प्रार्थना का गायन किया। इसके बाद महात्मा डॉ. अवमिंदर ने संस्थान की गतिविधियों और ‘अंतर्क्रांति’ प्रकल्प के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव आशुतोष महाराज की प्रेरणा से संचालित यह प्रकल्प बंदियों के आंतरिक परिवर्तन और पुनर्वास के लिए समर्पित है। इसका उद्देश्य बंदियों में आत्मसम्मान, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि वे जीवन में सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ सकें।

स्वामी धीरानंद ने सत्संग के दौरान कहा कि आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और निर्णयों का मूल्यांकन करने का अवसर देता है। जीवन में बदलाव की शुरुआत अपनी गलतियों को स्वीकार करने, उनसे सीखने और बेहतर आचरण का संकल्प लेने से होती है।

उन्होंने कहा कि सत्य, संयम, धैर्य, क्षमा और सद्भाव जैसे मूल्य व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बंदी सुधार की प्रक्रिया में सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन का भी विशेष महत्व है। ऐसे आयोजन बंदियों को निराशा से ऊपर उठकर भविष्य के प्रति आशावान बनने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर जेल अधिकारी विशाल डोगरा ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन बंदियों तक आध्यात्मिक चिंतन और जीवन को नई दिशा देने की प्रेरणा पहुंचाने का प्रभावी प्रयास रहा।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी जिला जेल प्रशासन कुल्लू और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संयुक्त प्रयासों से बंदियों के कल्याण और सुधार के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

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