शिमला में नशा मुक्ति केंद्रों पर प्रशासन सख्त, नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई नशा मुक्ति केंद्रों में नशा मिलने पर मालिक के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत चलेगा मुकदमा, 10 साल तक सजा का प्रावधान

खबर अभी अभी | शिमला | 06 अक्टूबर 2026

शिमला में नशे के खिलाफ जिला प्रशासन ने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की निगरानी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में आयोजित बैठक में केंद्र संचालकों को निर्धारित नियमों और न्यूनतम मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने कहा कि नशा मुक्ति केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित व्यक्ति को पुनर्वास के जरिए परिवार और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा मुक्ति केंद्र व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
बैठक में केंद्रों के भीतर मरीजों को नशा उपलब्ध करवाए जाने की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई गई। अनुपम कश्यप ने कहा कि जिन संस्थानों का उद्देश्य लोगों को नशे की लत से बाहर निकालना है, वहां नशे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एसएसपी गौरव सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में नशा तस्करों पर कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास पर भी समान गंभीरता जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी नशा मुक्ति केंद्र में नशे का कारोबार पाया जाता है तो केंद्र के मालिक के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों के लिए न्यूनतम मानकों, प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं काउंसलरों की उपलब्धता, मरीजों का पंजीकरण, मेडिकल एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन, रिकॉर्ड संधारण, मरीजों की सहमति, सुरक्षा, स्वच्छता और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर भी विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशासन ने सभी केंद्र संचालकों से अपनी सुविधाओं, उपचार एवं परामर्श व्यवस्था, स्टाफ, रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने को कहा है। जिला प्रशासन अब इन केंद्रों की संस्थागत निगरानी और पुनर्वास की गुणवत्ता पर विशेष फोकस करेगा।

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